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अलविदा की आखिरी नमाज, जानिये क्या है जुमातुलविदा का इतिहास और महत्व

अलविदा की आखिरी नमाज जुमातुलविदा का महत्व और इतिहास है बहुत खास
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लखनऊ

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Mahendra Pratap Singh

•

Updated: 15 Jun 2018, 5:25 PM IST

ramzan

अलविदा की आखिरी नमाज, जानिये क्या है जुमातुलविदा का इतिहास

लखनऊ. अलविदा की आखिरी नमाज यानी जुमातुलविदा मुस्लमानों के लिए ईद से पहले का दिन होता है। जुमातुल विदा को अरबी में 'जुमुुअतुल विदाअ' कहते है, जिसका मतलब होता है छोड़कर जाने वाले जुमे का दिन। रमजान का पाक महीना रोजों के कारण अपना महत्व रखता है। अब क्योंकि सप्ताह का यह दिन पवित्र महीने के अंत में आता है, इसलिए जुमातुलविदा को मुस्लिम समाज महत्वपूर्ण मानते हैं।

रमजान के आखिरी जुमे के मौके पर मस्जिदों में दोपहर को जुमातुल विदा की नमाज अदा की जाती है। नमाज पढ़ने से पहले मस्जिदों में पेश जुमातुलविदा का खुत्बा पढ़ा जाता है और नमाज के बाद अमन और खुशहाली की दुआएं मांगी जाती हैं। रमजान का पाक महीना बरकत का महीना माना जाता है इसलिए ऐसा माना जाता है कि नमाज के अंतिम महीने में सच्चे दिल से सवाब (नेकी) का कार्य करना चाहिए और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए।

ऐसे हुई जुमातुलविदा की शुरूआत

इस्लामिक कल्चर और ट्रेडिशन के मुताबिक, प्रोफेट मोहम्मद ने शुक्रवार को खास दिन बताया है। उनके मुताबिक हफ्ते के सारे दिनों के बीच शुक्रवार सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और खास माना जाता है। इसलिए अगर इस दिन कोई कुरान पढ़ता है और इबादत करता है, जो अल्लाह उसकी रखवाली करते हैं। नामज अदा करने से अल्लाह उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी करता है।

अल्लाह की इबादत, गरीबों की मदद और बुराइयों से तौबा करना है उद्देश्य

लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले नदीम इक्बाल बताते हैं कि जुमातुलविदा के बाद ईद की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस महीने की तरह अगले 11 महीने भी अल्लाह की इबादत, गरीबों की मदद और बुराइयों से तौबा करना चाहिए। यही रमजान में रोजा रकने का उद्देश्य होता है। ईद पर यही दुआ रहती है कि सब लोग मिल जुल कर रहें। बुराई का अंत हो और अल्लाह की नेमतों की बारिश हो, तभी त्योहार असल मायनों में पूरा होगा।

दिल से देते हैं खैरत और जकात

वहीं सोशल वर्कर अनम हसीब बताती हैं कि रमजान का पाक महीना बाकी सभी महीनों से अलग और महत्वपूर्ण होता है। रमजान के अंतिम जुमा के दिन लोग जिस कदर अल्लाह की इबादत करते हैं और दिल से खैरत और जकात देते हैं, उससे मालूम होता है कि यह दिन रमजान के दूसरे जुमों से ज्यादा खास होता है। कई सारी तैयारियां होती हैं, सेवइयां बनती हैं, कबाब और शीरमाल तैयार किया जाता है। इन सारी तैयारियों से पहले नमाज में खुदा का शुक्र अदा किया जाता है।