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Lucknow Fire Incident Update: कोचिंग सेंटर अग्निकांड में LDA उपाध्यक्ष ने मानी लापरवाही, बोले- 2016 में ही गिरनी थी इमारत!

Lucknow Fire Incident: लखनऊ अग्निकांड मामले में LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने माना- 8 साल पहले बिना जमीनी जांच के बिल्डिंग गिराने का आदेश वापस लिया गया था। विभाग की लापरवाही कुबूल करते हुए उन्होंने कहा कि ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लेने वाले 2016 के जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्हित कर लिया गया है।
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लखनऊ

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Mohsina Bano

Jun 24, 2026

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लखनऊ अग्निकांड में LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार का खुलासा (फोटो- पत्रिका)

Lucknow Coaching Center Fire Case: राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी (LDA) के वाइस चेयरमैन प्रथमेश कुमार ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने उस कोचिंग सेंटर बिल्डिंग के निर्माण और उसे गिराने के आदेश से जुड़ी लापरवाही का पूरा सच जनता के सामने रखा जिसके चलते यह दर्दनाक हादसा हो गया। एलडीए वीसी ने साफ किया है कि इस मामले में आंतरिक जांच पूरी कर ली गई है और दोषी अधिकारियों को चिन्हित कर लिया गया है।

2014 में पास हुआ था आवासीय नक्शा

एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि इस इमारत का आवासीय नक्शा साल 2014 में पास किया गया था। लेकिन जब भवन मालिक ने साल 2016 में वहां व्यावसायिक निर्माण शुरू कर दिया तो एलडीए के अधिकारियों ने उसे नोटिस जारी किया था। इसके बाद नियमों का उल्लंघन करने पर इमारत के ध्वस्तीकरण यानी उसे गिराने का आदेश भी पारित कर दिया गया था।

बिना उचित जांच वापस लिया आदेश

प्रथमेश कुमार ने आगे बताया कि साल 2016 में ही कुछ विशेष परिस्थितियों के चलते इमारत को गिराने का वह आदेश वापस ले लिया गया था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए था। यह आदेश सिर्फ इस आधार पर वापस ले लिया गया था कि आवेदक ने एक प्रार्थना पत्र देकर यह आश्वासन दिया था कि वह वहां केवल आवासीय निर्माण ही करेगा।

दोषी अधिकारियों की हुई पहचान

एलडीए उपाध्यक्ष ने इस पूरे प्रकरण में विभाग की बड़ी लापरवाही को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि अगर ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लिया गया था तो उसकी उचित तरीके से जमीनी स्तर पर जांच होनी चाहिए थी। निरीक्षण के बाद ही आगे की कोई कार्रवाई होनी चाहिए थी जो उस समय के अधिकारियों द्वारा नहीं की गई। इस घोर लापरवाही को लेकर एलडीए ने एक सघन आंतरिक जांच की है और इसके लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों की पहचान कर ली गई है।

विभागों की भूमिका सवालों के घेरे में

लखनऊ अग्निकांड की शुरुआती जांच और सामने आए दस्तावेजों ने कई सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), शिक्षा विभाग, बिजली विभाग और दमकल विभाग की कार्यशैली सीधे तौर पर जांच के घेरे में आ गई है। जब इस इमारत का नक्शा केवल आवासीय उपयोग के लिए पास किया गया था तो इसके अंदर धड़ल्ले से व्यावसायिक गतिविधियां क्यों और कैसे चलाई जा रही थीं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक आवासीय भवन में कमर्शियल गतिविधियों की इजाजत किसने दी और ये जिम्मेदार विभाग इतने सालों तक आंखें मूंदे क्यों बैठे रहे?