
ईशान आनंद फोटो एएनआई
Mayawati Appoints Ishan Anand BSP National Coordinator: बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को लखनऊ में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर नियुक्त करने की घोषणा की। यह पद इससे पहले बड़े भतीजे आकाश आनंद के पास था। मायावती ने 9 सितंबर को आकाश को पार्टी से बाहर कर दिया था।
मायावती सुबह ठीक 11 बजे बसपा कार्यालय पहुंचीं। उनके साथ छोटे भाई आनंद कुमार और ईशान आनंद भी थे। मायावती अपनी कुर्सी पर बैठते ही ईशान हाथ बांधकर काफी देर तक खड़े रहे। जब सुप्रीमो ने उनकी पीठ पर हाथ रखा तो उन्होंने पैर छूकर आशीर्वाद लिया। बैठक की व्यवस्था में भी बदलाव नजर आया। पहले मायावती के बगल में कुछ कुर्सियां लगाई जाती थीं, लेकिन इस बार प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल, महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, उपाध्यक्ष आनंद कुमार और ईशान आनंद के लिए भी सामने की पंक्ति में कुर्सियां रखी गईं। बैठक में दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह के पुत्र प्रिंस यूकेश सिंह सहित करीब 400 पदाधिकारी मौजूद रहे। राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष, प्रभारी तथा उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड के जिला अध्यक्ष और मंडल कोऑर्डिनेटर भी शामिल हुए।
मायावती के बार-बार बदले फैसलों ने पार्टी में असमंजस पैदा कर दिया है। 3 सितंबर को उन्होंने अचानक ईशान को मुख्य सेक्टर प्रभारी बना दिया और आकाश के सारे पद छीन लिए। चार दिन बाद बयान जारी कर कहा कि आकाश को आजाद कर दिया गया है क्योंकि वे अपने ससुर के प्रभाव में फैसले ले रहे थे। 12 सितंबर को मायावती ने फिर चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि कांशीराम की तरह वे भी परिवार के लोगों को पार्टी में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं देंगी। आकाश या ईशान दोनों को भविष्य में कोई पद नहीं मिलेगा। छोटे भाई आनंद के बारे में कहा कि जरूरत पड़ी तो बेटी दीपिका की मदद ली जा सकती है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार दीपिका ने इस योजना पर पानी फेर दिया। लंदन में वकालत की पढ़ाई कर रही दीपिका अपनी भाभी प्रज्ञा के साथ रहती हैं। उन्होंने भाई आकाश के साथ बुआ के बार-बार बदले फैसलों पर नाराजगी जताई और खुद राजनीति में आने से इनकार कर दिया। इसके बाद 21 सितंबर को मायावती ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि दीपिका को भी पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी क्योंकि शादी के बाद उनके पति का प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में छोटे भाई आनंद के छोटे बेटे ईशान को ही जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
ईशान आनंद 27 वर्ष के हैं। उन्होंने नोएडा के जेनेसिस ग्लोबल स्कूल से पढ़ाई की और फिर ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर में एलएलबी में दाखिला लिया, लेकिन डिग्री पूरी नहीं की। भारत लौटकर वे परिवार के कारोबार में शामिल रहे। मायावती ने इस साल अपने जन्मदिन पर उन्हें कार्यकर्ताओं से मिलवाया था। इसके बाद वे पार्टी कार्यक्रमों में दिखने लगे।
पार्टी में युवा और शिक्षित चेहरा तैयार करने की चर्चा लंबे समय से चल रही थी। आकाश ने भी युवाओं के बीच अपनी पहचान बनाने की कोशिश की थी। ऐसे में ईशान को आगे बढ़ाने को नई पीढ़ी से जुड़ने का प्रयोग माना जा रहा है। लेकिन कई नेता मानते हैं कि ईशान के पास अभी राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक सक्रियता सीमित है। केवल पारिवारिक संबंध और युवा चेहरे के आधार पर उन्हें आकाश का सीधा विकल्प बनाना जल्दबाजी हो सकती है।
आकाश के पार्टी से अलग होने के बाद अन्य दलों ने भी उन्हें न्योता दिया है। निषाद पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद, आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद और कांग्रेस नेताओं ने स्वागत का संकेत दिया। हालांकि आकाश ने अभी तक किसी अन्य दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है।
बसपा में परिवारवाद के इस नए अध्याय ने पार्टी की भविष्य की रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईशान आनंद अब परीक्षा की घड़ी में हैं कि वे आकाश की जगह कितना प्रभावी साबित हो पाते हैं।
Updated on:
23 Sept 2026 02:25 pm
Published on:
23 Sept 2026 02:14 pm
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