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मौसमी नेताओं और वोटों के सौदागरों से रहें सावधान! 2027 चुनाव से पहले यूपी के मंत्री संजय निषाद की मछुआरा समाज को बड़ी चेतावनी

Sanjay Nishad Statement: उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले निषाद और मछुआरा समाज के वोटों को लेकर सियासत तेज हो गई है। यूपी के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने मछुआरा समाज को मौसमी नेताओं और वोटों के सौदागरों से सावधान रहने की नसीहत दी है।
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लखनऊ

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Mohsina Bano

•

Updated: 14 Sep 2026, 3:45 PM IST

sanjay nishad

कैबिनेट मंत्री संजय निषाद (Photo-ANI)

UP Minister Sanjay Nishad:उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर संजय निषाद ने मछुआरा समाज को मौसमी नेताओं से सावधान रहने की बड़ी नसीहत दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बिना किसी का नाम लिए बिहार के विकासशील इंसान पार्टी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी पर जमकर निशाना साधा है और उन्हें वोटों का सौदागर करार दिया है।

मौसमी नेताओं से सावधान रहे मछुआरा समाज

संजय निषाद ने अपने बयान में कहा कि आजादी के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में मछुआरा समुदाय एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरा है। ऐसे में समाज के वोटों की दलाली करने वाले लोगों को पहचानने की सख्त जरूरत है। उन्होंने बिना नाम लिए तंज कसते हुए कहा कि कुछ मौसमी नेता अब तक यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें मुंबई में व्यापार करना है या फिर दूसरों की दरी बिछानी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में मछुआरा समुदाय के वोटों की खरीद-फरोख्त के लिए बदनाम लोग अब उत्तर प्रदेश में आकर निषाद समाज को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

'मछुआरा समुदाय पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं'

मंत्री संजय निषाद ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा कि जो व्यक्ति खुद अपने दम पर एक भी विधानसभा चुनाव जीतने की हैसियत नहीं रखता वह अपनी जेब में नोटों की गड्डी लेकर लाल टोपी और नीली वर्दी पहनकर उत्तर प्रदेश के निषाद समाज को राजनीति सिखाने चला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मछुआरा समुदाय पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं है। यूपी के मछुआरों को राजनीति सिखाने से पहले यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि संघर्ष और राजनीति उनके खून में रची बसी है।

वोटों की दलाली करने वालों को पहचानें

संजय निषाद ने आगे कहा कि मछुआरा समाज ने इतिहास में मुगलों और अंग्रेजों के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया था और देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई थी। संविधान के जरिए समाज को अधिकार और आरक्षण मिला लेकिन आपसी बिखराव के कारण हमेशा उनका हक छीना गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी केवट, मल्लाह, बिंद और कश्यप के नाम पर भेद पैदा कर समाज को एकजुट होने से रोकने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने समाज से अपील की कि वे दूसरे दलों से पैसा लेकर वोटों का सौदा करने वालों को पहचान लें और अपने स्वाभिमान से कोई समझौता न करें।

UP में सक्रिय हैं मुकेश सहनी

संजय निषाद के बयान को बिहार के विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी से जोड़कर देखा जा रहा है। मुकेश सहनी खुद को मछुआरा समाज की राजनीति से जोड़ते हैं और उनकी पार्टी बिहार में विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है। मुकेश सहनी आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में सक्रिय हैं। वह निषाद और मछुआरा समाज के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए जनसंपर्क और कार्यक्रम कर रहे हैं।

ऐसे में यदि मुकेश सहनी की वीआईपी उत्तर प्रदेश में चुनावी मैदान में उतरती है और निषाद बहुल इलाकों में प्रभाव बढ़ाती है, तो मछुआरा समाज के वोटों के बंटने की संभावना बन सकती है। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव से पहले संजय निषाद ने अपने समाज को एकजुट रहने और दूसरे नेताओं से सावधान रहने का संदेश दिया है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में मुकेश सहनी का सीधे नाम नहीं लिया।

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