हालांकि शिवपाल के कांग्रेस में आने की बात अभी फाइनल नहीं हुई है, लेकिन दोनों तरफ से प्रयास जारी हैं। दरअसल कांग्रेस को लग रहा है कि शिवपाल सिंह के आने से समाजवादी पार्टी के गढ़ में उसकी मजबूत पैठ बन सकती है। कांग्रेस शिवपाल के सहारे इटावा, फर्रूखाबाद, फिरोजाबाद, मैनपुरी और संभल में अपने आप को मजबूत कर सकती है। शिवपाल शुरू से जमीन से जुड़े बड़े नेता रहे हैं इसलिए उनके साथ लगभग हर जिले में बड़े पैमाने पर वर्कर हैं। ऐसे में अगर शिवपाल कांग्रेस के साथ आ सकते हैं, तो ये सारे वर्कर भी उनके साथ आ जाएंगे। इससे यूपी में वर्कर की कमी से जूझ रही कांग्रेस को काफी मजबूती मिलेगी।