
3720 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व संग्रह, महिलाओं को मिला 47 करोड़ से ज्यादा कमीशन; 16 हजार से अधिक सक्रिय विद्युत सखियां गांवों में संभाल रहीं जिम्मेदारी (फोटो सोर्स :file photo, Ritesh Singh )
Vidyut Sakhi: उत्तर प्रदेश के गांवों में बिजली बिल जमा कराने की व्यवस्था अब हजारों महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं ‘विद्युत सखी’ बनकर ग्रामीण उपभोक्ताओं के बिजली बिल जमा कराने के साथ अपने परिवार की आमदनी बढ़ा रही हैं। प्रदेश में विद्युत सखियों ने अब तक करीब 1.80 करोड़ उपभोक्ताओं के बिजली बिल जमा कराए हैं। इस माध्यम से 3720 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व संग्रह हुआ है, जबकि महिलाओं को 47 करोड़ रुपये से ज्यादा कमीशन मिला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के समन्वय से संचालित यह पहल ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तिकरण और उपभोक्ता सुविधा को एक साथ जोड़ रही है।
विद्युत सखी योजना के तहत प्रदेश में अब तक 31 हजार से अधिक महिलाओं का पंजीकरण किया गया है। इनमें से 16 हजार से अधिक महिलाएं सक्रिय रूप से बिजली बिल संग्रह का काम कर रही हैं। ये महिलाएं अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में उपभोक्ताओं से बिजली बिल का भुगतान प्राप्त कर उसे डिजिटल माध्यम से जमा कराने में मदद करती हैं। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलता है और उन्हें कमाई के लिए दूर शहरों की ओर जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
योजना की खास बात यह है कि इससे जुड़ी महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों में भी भागीदारी कर रही हैं। गांवों में ही काम मिलने से उनके समय और आवागमन पर होने वाला खर्च कम होता है। वहीं, नियमित काम और कमीशन के जरिए वे परिवार की आय में योगदान दे पा रही हैं।
विद्युत सखियां ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विभाग और उपभोक्ताओं के बीच संपर्क का माध्यम बन रही हैं। पहले कई उपभोक्ताओं को बिजली बिल जमा करने के लिए दूर स्थित कार्यालयों या भुगतान केंद्रों तक जाना पड़ता था। स्थानीय स्तर पर विद्युत सखियों की उपलब्धता से उन्हें गांव के आसपास ही भुगतान की सुविधा मिल रही है। इससे समय बचने के साथ आवागमन की परेशानी भी कम हो सकती है। यह व्यवस्था बिजली विभाग के लिए भी उपयोगी साबित हो रही है। विद्युत सखियों के माध्यम से बड़ी संख्या में बिलों का भुगतान डिजिटल प्रक्रिया से किया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भुगतान सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और राजस्व संग्रह में सहयोग मिल रहा है। इस प्रकार योजना महिलाओं की आजीविका के साथ सार्वजनिक सेवाओं को लोगों के करीब लाने का भी माध्यम बन रही है।
विद्युत सखी योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें बिजली बिल जमा कराने की प्रक्रिया और डिजिटल भुगतान प्रणाली से परिचित कराया जाता है। महिलाएं ई-वॉलेट के माध्यम से उपभोक्ताओं के बिल जमा करती हैं और निर्धारित नियमों के अनुसार कमीशन प्राप्त करती हैं।
योजना की दी गई जानकारी के मुताबिक, 2000 रुपये तक का बिजली बिल जमा कराने पर विद्युत सखी को 20 रुपये तक कमीशन मिलता है। बिलों की संख्या और कुल भुगतान के आधार पर उनकी कमाई बढ़ सकती है। हालांकि, वास्तविक आय इस बात पर निर्भर करती है कि कोई विद्युत सखी कितने बिल जमा कराती है और संबंधित भुगतान पर कितना कमीशन निर्धारित है। अब तक 47 करोड़ रुपये से अधिक कमीशन अर्जित किया जाना इस व्यवस्था के आर्थिक दायरे को दर्शाता है। इससे जुड़ी महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर नियमित काम करने और अपनी आय में योगदान देने का अवसर तैयार हुआ है।
विद्युत सखी योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना भी है। ई-वॉलेट और डिजिटल माध्यमों के जरिए बिल जमा कराने की प्रक्रिया से ग्रामीण उपभोक्ताओं का संपर्क डिजिटल वित्तीय सेवाओं से बढ़ रहा है। स्थानीय स्तर पर सहायता मिलने से उन लोगों को भी सुविधा मिल सकती है, जिन्हें ऑनलाइन भुगतान प्रक्रिया समझने या उसका इस्तेमाल करने में कठिनाई होती है। विद्युत सखियां भुगतान प्रक्रिया में सहयोग देकर उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के बीच समन्वय स्थापित करती हैं। इस काम से महिलाओं को तकनीकी जानकारी और वित्तीय लेनदेन का व्यावहारिक अनुभव भी मिलता है। इससे उनके कार्यक्षेत्र का विस्तार होता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी बढ़ती है।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के अनुसार, प्रदेश में 16 हजार से अधिक सक्रिय विद्युत सखियां ग्रामीण उपभोक्ताओं तक सेवाएं पहुंचा रही हैं। उनके मुताबिक, इस पहल से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ सामाजिक सम्मान में भी वृद्धि हो रही है। बिजली विभाग को राजस्व संग्रह के लिए अतिरिक्त माध्यम मिल रहा है, जबकि उपभोक्ताओं को घर के नजदीक भुगतान की सुविधा उपलब्ध हो रही है। स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे महिलाओं को अपने कौशल का उपयोग करने और परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग देने का अवसर मिल रहा है।
विद्युत सखी योजना के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय सेवाओं से जोड़कर बड़े स्तर पर आर्थिक गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। 1.80 करोड़ लोगों के बिजली बिल जमा कराने, 3720 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व संग्रह और 47 करोड़ रुपये से ज्यादा कमीशन की उपलब्धि इस नेटवर्क के विस्तार को दर्शाती है। गांवों में रोजगार, डिजिटल भुगतान और बिजली बिल जमा करने की सुविधा को एक साथ जोड़ने वाली यह व्यवस्था महिला स्वावलंबन के साथ ग्रामीण सेवा वितरण को भी मजबूत करने का प्रयास है। आने वाले समय में इस तरह की योजनाओं की प्रभावशीलता महिलाओं की सक्रिय भागीदारी, उपभोक्ताओं तक नियमित पहुंच और भुगतान सेवाओं की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी।
Updated on:
25 Oct 2026, 6:10 PM IST
Published on:
25 Oct 2026, 6:10 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.