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उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए Good News, जुलाई से कम आएगा बिल

उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिली है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने फ्यूल सरचार्ज (FPPCA) की नई दरें जारी कर दी हैं। नई दरों में बिजली की दर कम की गई है।
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लखनऊ

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Vinay Shakya

Jun 29, 2026

Electricity bill: 6 महीनों के औसत बिल पर नजर रखी जाएगी (Photo Source - Patrika)

UPPCL ने बिजली की दरें घटाईं (फोटो- पत्रिका)

UPPCL Reduces Electricity Rates: उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने सोमवार शाम को फ्यूल सरचार्ज (FPPCA) की नई दरें जारी कर दी हैं। नई दरों में बिजली के दाम कम (Reduces Electricity Rates) कर दिए गए हैं। UPPCL के इस निर्णय से करोड़ो बिजली उपभोक्ताओं को फायदा होगा।

UPPCL ने प्रति यूनिट पर कम किए 16 पैसे

UPPCL ने फ्यूल सरचार्ज (FPPCA) की नई दरों में हर यूनिट पर 16 पैसे कम कर दिए हैं। बिजली की नई दरें जुलाई 2026 से लागू होंगी। नई दरें लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट पर 4.43 प्रतिशत कम पैसे चुकाने होंगे। UPPCL ने विद्युत नियामक आयोग के आदेश के बाद यह निर्णय लिया है। बिजली उपभोक्ताओं के लिए पिछले 15 महीनों में यह सबसे बड़ी राहत है। इसके पहले मार्च- 2026 में बिजली दरें 2.42% कम हुई थीं।

क्यों सस्ती हुई बिजली?

विद्युत नियामक आयोग ने सालाना टैरिफ ऑर्डर में बिजली खरीद की औसत लागत ₹4.94 प्रति यूनिट तय की थी। लेकिन, बिजली कंपनियों ने अप्रैल- 2026 में वास्तविक बिजली महज 4.78 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदी। बिजली खरीद की लागत में आई इस कमी (16 पैसे प्रति यूनिट) का सीधा फायदा अब उपभोक्ताओं को जुलाई के बिल में घटाकर दिया जा रहा है।

बिजली कंपनियों को झटका

बिजली कंपनियों ने गलत तरीके से गणना करके जून महीने में फ्यूल सरचार्ज 10% वसूला था। उपभोक्ता परिषद ने बिजली कंपनियों की मनमानी की शिकायत उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में की थी। नियामक आयोग ने 23 जून 2026 को इस पर बड़ा आदेश जारी किया था। नियामक आयोग ने इस आदेश में बिजली कंपनियों को फ्यूल सरचार्ज (FPPCA) की गणना केवल उसी महीने की वास्तविक बिजली खरीद और ट्रांसमिशन चार्ज के आधार पर करने को कहा था।

बिजली कंपनियों को इसमें किसी दूसरे महीने का पुराना घाटा या लायबिलिटी जोड़ने से मना किया था। इसके अलावा बिजली कंपनियों ने पिछले 14 महीनों में गलत गणना करके उपभोक्ताओं से करीब 2 हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त वसूली की है। इसे वापस दिलाने के लिए भी उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में अलग से याचिका दाखिल की थी।