दरअसल आरकॉम ने स्वीडन की कंपनी एरिक्सन के साथ 2014 देशभर में टॉवर के मेंटीनेंस की 7 साल के लिए डील की थी। घटते रेवेन्यू के चलते एरिक्सन का आरकॉम पर करीब 978 करोड़ रुपए बकाया है, जो अब बढ़कर 1,600 करोड़ रुपए हो गया है। इसलिए ही आरकॉम के खिलाफ बैंकरप्सी के लिए स्वीडन के टैलीकॉम इक्विपमैंट मेकर एरिक्सन ने एन.सी.एल.टी. का दरवाजा खटखटाया था। एरिक्सन की ओर से 3 याचिकाएं दायर की गई थीं और तीनों को एन.सी.एल.टी. ने स्वीकार कर लिया। इसी की वसूली के लिए स्वीडिश कम्पनी ने यह याचिका दायर की थी।