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RBI के नए फ्लोटिंग बॉन्ड के नियम क्या हैं? निवेशकों के लिए क्या बदला, क्या नहीं… समझिए

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके निवेश को और भी सुरक्षित और सुविधाजनक कैसे बनाया जा सकता है? आरबीआई के नए नियमों के साथ, अब आपके फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स में वो सभी फायदे हैं, जो आपको एक स्मार्ट निवेशक बनाते हैं!
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Ravi Gupta

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Updated: 31 Oct 2026, 5:40 PM IST

Credit- Janani AI

भारतीय रिजर्व बैंक ने 2 अप्रैल 2026 को फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स, 2020 (कर योग्य) के लिए संशोधित संचालन दिशानिर्देश जारी किए। यह परिपत्र निवेशकों को नहीं, बॉन्ड जारी करने वाले रिसीविंग ऑफिसों (बैंकों) को संबोधित है। उत्पाद की संरचना जस की तस है : 7 साल की अवधि, NSC दर + 35 बेसिस पॉइंट और छमाही रीसेट।

ऑनलाइन सुविधाएं: दो अलग समय-सीमाएं

  • बॉन्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा रिसीविंग ऑफिसों को 30 सितंबर 2026 तक देनी थी।
  • होल्डिंग देखना, नामांकन बदलना, समय-पूर्व निकासी का अनुरोध करना, और CoH, ब्याज/रिडेम्प्शन स्टेटमेंट व TDS प्रमाण-पत्र डाउनलोड करना, ये सुविधाएं 31 दिसंबर 2026 तक उपलब्ध करानी हैं।

यानी सभी बैंकों में पूरी ऑनलाइन सेवा अभी शुरू हुई हो, यह जरूरी नहीं। आप अपने संबंधित बैंक से पूछताछ कर सकते हैं।

नामांकन में राशि-वार बंटवारा

एक से अधिक नामित व्यक्ति हों तो निवेशक बता सकता है कि किसे कितनी राशि मिलेगी। हर नामित को कम से कम ₹1,000 और उसके बाद ₹1,000 के गुणकों में राशि मिलेगी। यह सुविधा नए निवेशों के लिए 30 सितंबर 2026 तक और मौजूदा निवेशों के लिए 31 दिसंबर 2026 तक देनी है।

ब्याज: हर छह महीने मिलता है

ब्याज दर NSC दर + 0.35% है और हर 1 जनवरी व 1 जुलाई को रीसेट होती है। भुगतान भी इन्हीं तारीखों को होता है। 1 जनवरी से 30 जून 2026 की दर 8.05% (7.70% + 0.35%) थी, जो 1 जुलाई 2026 को देय थी। जुलाई-दिसंबर 2026 के लिए भी दर 8.05% ही रखी गई है, जिसका भुगतान 1 जनवरी 2027 को होगा। अंतिम अवधि का ब्याज मूलधन के साथ दिया जाता है।

बैंकों की जवाबदेही और मुआवजा

  • बैंकों को निवेश की राशि दो कार्यदिवसों में CAS को भेजनी होती है। देरी पर सरकार द्वारा चुकाया गया ब्याज बैंक से वसूला जाता है, और बार-बार देरी पर जुर्माना लग सकता है।
  • निवेशक की गलती के बिना ब्याज या रिडेम्प्शन में देरी हो तो बैंक को लागू कूपन दर पर मुआवजा देना होगा।
  • नियमों के उल्लंघन से निवेशक को आर्थिक नुकसान हो, तब भी मुआवजा देय है।

BLA और CoH

हर निवेशक का एक ही बांड लेजर अकाउंट (BLA) होता है, और बाद के सभी निवेश उसी में जुड़ते हैं। राशि मिलने के तीन कार्यदिवसों में CoH जारी होना चाहिए, और उसे ईमेल पर भी भेजा जा सकता है।

समय-पूर्व निकासी (पहले जैसी शर्तें)

यह सुविधा 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्तिगत निवेशकों के लिए है। न्यूनतम लॉक-इन 60-70 वर्ष के लिए 6 साल, 70-80 के लिए 5 साल और 80+ के लिए 4 साल है। निकासी पर अंतिम छह महीने के देय ब्याज का 50% दंड के रूप में काटा जाता है। ये शर्तें 2020 की अधिसूचना से चली आ रही हैं।

परिपक्वता

बॉन्ड सात साल बाद परिपक्व होता है और राशि निवेशक के बैंक खाते में जमा होती है। बैंक को कम से कम एक माह पहले सूचना देनी होती है। खाता बदलना हो तो परिपक्वता से कम से कम 15 दिन पहले अपडेट करें।

टैक्स और PAN

कर-छूट का प्रमाण न देने पर ब्याज पर TDS कटता है, और बैंक को TDS प्रमाण-पत्र देना होता है। आवेदन के साथ PAN जरूरी है। PAN न हो तो Form 97 में घोषणा दी जा सकती है, और नाबालिग निवेशक अभिभावक का PAN दे सकता है। ₹10 लाख या अधिक के निवेशों की SFT रिपोर्टिंग और निजी डेटा पर DPDP कानून का पालन बैंकों की जिम्मेदारी है।

शिकायत कहां करें

बैंकों को निवेशकों के सेवा-अनुरोध पांच कार्यदिवसों में निपटाने होते हैं। शिकायत के एक महीने में जवाब न मिले, या बैंक के escalation matrix के बाद भी निवेशक संतुष्ट न हो, तब वह RBI से संपर्क कर सकता है।

निवेशक अभी क्या करें

  • अपने बैंक से पूछें कि ऑनलाइन आवेदन और 31 दिसंबर 2026 वाली सेवाएं कब से चालू हैं।
  • एक से अधिक नामित हों तो राशि-वार बंटवारा दर्ज कराएं।
  • बैंक खाता और ईमेल अपडेट रखें।
  • TDS में छूट पात्र हो तो उचित फॉर्म समय पर जमा करें।
  • ब्याज या भुगतान में देरी हो तो मुआवजे का दावा करें।

डिस्क्लेमर: यह सामान्य जानकारी है, वित्तीय सलाह नहीं। निर्णय से पहले अपने बैंक या RBI की वेबसाइट से पुष्टि करें।