
मथुरा। ब्रजभाषा वोई भाषा है, जामें मांगी माखन रोटी
ब्रजभाषा के आगे लागे, हर कोई भाषा खोटी।
ब्रजभाषा ने नाईं देय बस भाषा के अभिमानी
ब्रज भाषा ने दये जगत कूं तुलसी सूर सो ज्ञानी।।
जिस ब्रजभाषा में भगवान श्रीकृष्ण ने माता यशोदा से मांखन रोटी मांगी थी, वही ब्रज भाषा ब्रज में ही बेगानी हो गयी थी। ठेठ ब्रजभाषी और ब्रज भाषा से प्यार करने वाले चुनिंदा लोग ही मूल ब्रजभाषा का प्रयोग बोलचाल में करते थे। पुराने लोगों को इस बात की टीस भी थी।
पद्मश्री मोहनस्वरूप भाटिया, प्रभूदयाल, जैसे लोगों ने ब्रजभाषा के भूले बिसरे शब्दों को संजोने का भरसक प्रयास किया। प्रभूदयाल ने बाइबलि का अनुवाद ब्रजभाषा में किया तो मोहनस्वरूप भाटिया ने लोकगीत, सावन की मल्हार, शादी के समय गाये जाने वाले गीतों और लोक संस्कृति में रचे बसे शब्दों को संजोने का काम किया।
प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों के छात्र छात्राओं का भाषायी ज्ञान बढ़ाने के लिए स्टेट काउंसिल आफ एजुकेशनल रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग ने बच्चों के स्कूलों में भोजपुरी, अवधी और ब्रजभाषा का अध्यन कराए जाने का फैसला लिया है। इसके पीछे का उद्देश्य यह बताया गया है कि इससे बच्चों का भाषायी ज्ञान बढ़ेगा। बच्चों के अंदर अपनी बोली के प्रति लगाव भी बढ़ेगा।
मथुरा के ब्रज भाषा पे्रमियों ने सरकार के इस फैसले का तहेदिल से स्वागत किया है। इस बात की उम्मीद जगी है कि जंगल से जड़ी बूटियों की तरह विलुप्त हो रहे ठेठ ब्रजभाषा के शब्दों को फिर से बोलचाल में लाया जा सकेगा। यह काम तभी संभव है जब ब्रजभाषा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। ब्रजभाषा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किये जाने मांग ब्रजभूमि से लम्बे समय से उठती रही है। इसके लिए बाकायदा आंदोलन भी छेड़ा गया था। सरकार के इस फैसले ने ब्रजभाषा के प्रेमियों को मुहं मांगी मुराद दे दी है।
मथुरा सहित चार जनपदों में पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया
मथुरा सहित चार जनपदों को प्रदेश भर में पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। इन जनपदों में वहां की स्थानीय बोलियों को प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाया जाएगा। मथुरा में ब्रजाभाषा को पढ़ाया जाएगा। अभी तक ब्रजभाषा बोलचाल में थी अब बच्चे इसे बच्चे लिखेंगे और पढ़ेंगे भी।
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विद्यार्थी और अध्यापकों ने जताई खुशी
मुकुन्द प्राइमरी स्कूल की अध्यापिका अर्चना सिंह का कहना है कि हम ब्रजभाषा में बच्चों को पढ़ाने के लिए तैयार हैं। ब्रजभाषा को यहां बच्चे उसी समय सीख लेते हैं जब वह तुतला कर बोलना शुरू करते हैं। यहां की माताओं की भाषा भी ब्रज भाषा है और वह अपने नन्हे बच्चों से ब्रजभाषा में ही बात करती हैं। ब्लैक स्टोन प्राइमरी स्कूल की अध्यापिका कुसुम रानी अग्रवाल का कहना है कि ब्रजभाषा में अध्यापन कार्य कराना उनके लिए मुश्किल नहीं है। लाल स्कूल कोतवाली की अध्यापिका रेखा चतुर्वेदी और ब्लैक स्टोन की प्रधानाध्यापिका रश्मिी सिंह ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।
वर्जन
लंबे समय से ब्रज भाष को पाठयक्र में शामिल कराने का प्रयास था। उत्तर प्रदेश सरकार ने ब्रज भाषा की महत्ता को समझते हुए यह निर्णय लिया है। इससे ब्रज की संस्कृति और पुष्पित होगी। दुनिया के लोग इससे आकर्षित भी हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने के लिए यह आवश्यक कदम है।
श्रीकांत शर्मा, ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा श्रोत मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
Updated on:
13 Sept 2019 09:38 pm
Published on:
13 Sept 2019 09:24 pm
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