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बदहाली की दास्तां बयां करता मथुरा का डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेशों को दरकिनार कर अधिकारी कर रहे अपनी मनमानी।
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District Hospital

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मथुरा। उत्तर प्रदेश के तेजतर्रार मुखिया योगी आदित्यनाथ ने बेशक सरकारी दफ्तरों में पान गुटखा खाने पर प्रतिबंध लगा दिया हो लेकिन उनके इस आदेश का कर्मचारियों पर कोई प्रभाव नहीें है। प्राथमिक चिकित्सा दिवस के मौके पर पत्रिका की टीम ने मथुरा के डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल का जायजा लिया तो हालात बेहद बदतर पाए। डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में जहां पान और गुटखे की पीक परिसर को गंदा कर रही है तो वहीं डॉक्टर भी समय से पहुंचना जरूरी नहीं समझते। इसके अलावा भी कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। आइए ले चलते हैं आपको मथुरा के डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में—

डॉक्टरों के चैंबर मिले खाली
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसलों का कितना पालन किया जा रहा है इसका जायजा लेने के लिए सुबह 9 बजे पत्रिका की टीम डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल पहुंची। वहां देखा कि जगह-जगह तंबाकू, पान और गुटखे के निशान पड़े हैं। ज्यादातर डॉक्टरों के चैंबर खाली हैं। जब इस बारे में कर्मचारी से बात की गई तो उसका कहना था कि डॉक्टर साहब कुछ देर पहले ही गए हैं, थोड़ी देर में आ जाएंगे। वहीं हॉस्पिटल में इंतजार कर रहे मरीजों का कहना था कि डॉक्टरों का ये रवैया एक दिन का नहीं बल्कि रोजाना का है। हॉस्पिटल में डॉक्टर को दिखाने के लिए उन्हें हर रोज काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है।

पानी की व्यवस्था का हाल खराब
चिलचिलाती गर्मी में मरीजों के लिए साफ पानी की भी व्यवस्था नहीं है। हॉस्पिटल में मरीजों के लिए एक आर ओ प्लांट लगाया गया था ताकि मरीजों को शुद्ध पानी पीने के लिए मिल सके। लेकिन ये प्लांट भी बदहाल हालात में है। एक साल से से ये प्लांट खराब पड़ा है। इसकी टोटियां उखड़ी हुई हैं और देखभाल करने वाला कोई नहीं है। आपको बता दें कि पूरे हॉस्पिटल में इसी प्लांट से पानी की सप्लाई इसी आर ओ प्लांट से जाती है। पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी मौजूद न होने के कारण तीमारदार बाहर से पानी खरीदकर पी रहे हैं।

आठ महीने से नहीं रैबीज इंजेक्शन
पड़ताल करते हुए टीम जब थोड़ा आगे बढ़ी तो देखा कि हॉस्पिटल में लगभग आठ महीने से रैबीज का इंजेक्शन मौजूद नहीं है। यानी किसी व्यक्ति को यदि बंदर या श्वान काट ले तो उसे हॉस्पिटल में कुछ नहीं मिलेगा। इंजेक्शन लगवाना है तो बाजार से खरीद कर लाना होगा। इस पूरे मामले को लेकर जब हॉस्पिटल के सीएमएस अमिताभ पांडेय से बात की गई तो वो कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।