कंठी माता मंदिर के पुजारी दिनेश नौटियाल का कहना है कि मंदिर परिसर में कंठी, शीतला, ललिता, फूलवती, खोखो, मसानी, चंडी, चामुंडा, भूमिया और चामंड माता की मूर्तियां हैं। वैसे तो लोग यहां रोजाना देवी का आशीर्वाद लेने आते हैं, लेकिन होली पर विशेष पूजा-अर्चना होती है। यह पूजा शिवरात्रि से शुरू होकर होलिका दहन वाले दिन तक चलती है। उन्होंने बताया कि जब से कंठी माता का मंदिर स्थापित हुआ है, तभी से होली पर इन देवियों की विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा है। पुजारी दिनेश नौटियाल का कहना है कि ऐसा माना जाता है कि होली पर मौसम में परिवर्तन होता है। इसमें रोगों का आगमन होता है। होली पर अपनी भक्ति भावना से देवी माताओं के गुस्से को ठंडा करने और जले दिनों को शांत करने के लिए देवी माताओं की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस विशेष पूजा-अर्चना से देवी प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इस पूजा में रोगी शामिल होते हैं तो वे भी रोगमुक्त हो जाते हैं।