उनका कहना था कि बेटा देश के ऊपर शहीद हुआ, इसका कोई दुख नहीं है। दुख इस बात का है कि जिस देश के ऊपर शहीद हुआ, उसकी सरकार शहीदों का अपमान कर रही है। शहीदों के परिजनों की उपेक्षा की जाती है। जब कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तो उनको बुला लिया जाता है, जबकि सालों-साल कोई आकर पूछता तक नहीं है। उन्होंने कहा सुविधा के लिए चक्कर काट-काटकर चप्पले घिस गई, लेकिन कुछ नहीं हासिल हुआ। बेटे का मैडल ही एकमात्र सहारा है, जिसको उन्होंन सीने से लगा रखा है।