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Holi 2020: जुलूस निकालकर इस तरह सम्पन्न हुआ रंगोत्सव, कायम रही पुरानी परंपरा

Highlights जुलूस में लोग प्रसाद के रूप में दे रहे थे ठंडाई सुरक्षा के लिए तैनात था काफी पुलिस फोर्स जुलूस मेरठ कैंट क्षेत्र के मुख्य मार्गों से गुजरा
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मेरठ

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Sanjay Kumar Sharma

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Updated: 10 Mar 2020, 5:59 PM IST

meerut

मेरठ। मेरठ कैंट के लालकुर्ती मेे दशकों से होली पर कायम है ये परंपरा। रंगोत्सव के दिन निकलता है ये जलूस, जिसमें होते हैं मोल्लहले के लोग शामिल। जिस स्थान से ये जलूस निकल जाता है वहां वहा रंग उत्सव समाप्त हो जाता है। उसके बाद कोई किसी पर रंग नहीं डालता। मंगलवार को भी 12 बजे शुरू हुए इस जलूस मेें लालकुर्ती के सम्मानित लोग और बुजुर्ग उपस्थित रहे। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रहा।

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मंगलवार को भी ठीक 12 बजे ढोल नगाड़ों के साथ लालकुर्ती के सम्मानित और बुजुर्ग लोग बैलगाड़ी आदि पर सवार होकर चले। आगे आगे बैंडबाजा और ढोल वाले चल रहे थे और पीछे-पीछे लालकुर्ती वासी। सभी लोग होली की बधाई डे रहे थे। ये लोग जहां जहां से निकले वहा से होली का रंग उत्सव मनाना रुक गया। इस दौरान इस जुलूस पर महिलाओं ने रंग और पानी डाला। जुलूस में शामिल लोगों ने लालकुर्ती वासियों को होली की शुभकामनाएं दी। जुलूस में शामिल लोग प्रशाद के रूप में ठंडाई बाट रहे थे। सभी लोग ठंडाई का आनंद उठा रहे थे। जुलूस के आगे और पीछे भारी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद था। जो सुरक्षा के लिए तैनात था। कई थानों का फोर्स और पीएसी भी तैनात थी। जुलूस करीब दो बजे वापस पंचायती मंदिर में आकर खत्म हुआ।

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लालकुर्ती स्थित पंचायती मंदिर से वर्षों से होली का जुलूस निकलता है। इसमें दो डोले होते हैं एक में रंग से भरा ड्रम होता है दूसरे में ठंडायी होती है। एक ओर रंगों की बौछार होती है तो दूसरी ओर जुलूस में शामिल लोग ठंडाई का सेवन करते चलते हैं। जुलूस क्षेत्र के मुख्य मार्गों और मोहल्लों से गुजरता है, रंग की बौछारें डालते चलते हुए लोगों के हुजूम को देखने होली खेलने वालों को भी रोमांच से भर देता है। जुलुस का आयोजन श्री सनातन धर्म युवक सभा के आकाश अग्रवाल ने बताया कि जुलूस की पंरपरा काफी पुरानी है। मंदिर से जुलूस आरंभ होता है। यह मान्यता है जहां-जहां से जुलूस गुजरता जाता है वहां वहां रंग खेलने पर विराम लगता जाता है।