आलू का मुद्दा राजनीतिक न बनने देने के लिए योगी सरकार ने हरसंभव कदम उठाने का फैसला किया है। लखनऊ में विधानसभा के बाहर काफी बोरी आलू फेका गया था। जिसे समाजवादी पार्टी ने मुद्दा बनाया था। बसपा और कांग्रेस भी आलू उत्पादक किसानों के हितों की बात सार्वजनिक रूप से कर सरकार को घेरने की बात करती रही है। पिछले साल सरकार ने सत्ता संभालने के तत्काल बाद एक लाख मीट्रिक टन आलू 487 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा था। इससे आलू के बाजार भाव चढ़ गए थे और किसानों को खुले बाजार में भी वाजिब दाम मिल सका। इसके लिए उद्यान विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। यहां बता दें कि बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत कुल उत्पादन के 20 फीसदी हिस्से की सरकारी खरीद हो सकती है। इस समय किसान कच्चे आलू की खुदाई कर रहे हैं, जो उपयोग न होने की स्थिति में 3-4 दिन में ही काला पड़कर खराब हो जाता है। इसलिए किसान उतने ही आलू की खुदाई कर रहे हैं, जितना मंडी में बिक जाए।