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भरणी नक्षत्र और शनि जयंती में एेसे करें वट सावित्री पूजा, जानिये विधि

वट वृक्ष की करें पूजा, खंडित टहनियों की पूजा से परहेज करें  
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मेरठ

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Sanjay Kumar Sharma

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Updated: 14 May 2018, 8:42 PM IST

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मेरठ। इस बार वट सावित्री कई प्रकार से विशेष हैं। ऐसा हम नहीं ज्योतिषचार्य कह रहे हैं। सूर्योदनी ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या 15 मई को प्रातः 05.34 से प्रारम्भ होगी। इसलिए प्रातः अथवा उसके बाद की जाने वाली बड़ अमावस्या की पूजा शनि जयंती पर मंगलवार को भरणी नक्षत्र में होगी।

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न पूजें खंडित टहनियां, सम्पूर्ण वट वृक्ष की पूजा करें

पंडित भारत ज्ञान भूषण का कहना है कि जिस प्रकार खंडित मूर्ति की पूजा नहीं की जाती, उसी प्रकार पवित्र पूजनीय वट वृक्ष की खंडित टहनियों का पूजन वर्जित होता है। इसलिए वट वृक्ष की छत्र छाया में ही जाकर पूजन करें। वट वृक्ष का पोषण करें न कि वट वृक्ष को वट वृक्ष की टहनियां तोड़-तोड़ कर खंडित पूजा करें अतः सकारात्मक की जगह नकारात्मक प्रभाव जीवन में लाने से बचें। वट वृक्ष, ब्रहमा, सावित्री पूजन का श्रेष्ठ समय मंगलवार को सूर्योदय के समय ही है।

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ऐसे पूजें वट वृक्ष को ब्रहमा, सत्यवान व सावित्री के साथ

बांस की दो टोकरियां सप्त धान से भर लें यह सात अनाज गेहूं, जौ, तिल, चावल, कंगनी, ज्वार, उरद टोकरियों में क्रम से भरें तथा पहली टोकरी में ब्रहमा जी के तथा उसके नीचे नाशपाती, लीची आदि स्त्रीवाचक फल रखें तथा सुहाग की वस्तुएं सती सावित्री को अर्पित करें तथा वरदान मांगे अक्षय सौभाग्य व अक्षय उन्नति का। इसके बाद बड़ पूजन कर बड़ को सीचें तथा कच्चे सूत को हाथ में लेकर वट वृक्ष पर लपेटते हुए सात परिक्रमा करते हुए यह भावना करें कि इस देव वृक्ष के तने में सतोगुणी विष्णु शक्ति का वास है तथा इस वृक्ष की रक्षा तथा पोषण का दायित्व पूर्णतः हमारा है। तभी हो सकेगी बड़ पूजन की सार्थकता।

यथा शक्ति करें दान

पूजन के बाद यथाशक्ति गरीबों को दान करें। हो सके तो उनको खाना भी खिलाएं। गरीबों को दान करने से पूजा और व्रत का फल लगता है। दान जो भी हो यथाशक्ति हो। जरूरी नहीं कि दान अपनी हैसियत से अधिक हो।

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