
Vindhyachal Temple Mirzapur, UP: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर स्थित मां विंध्यवासिनी धाम में इस बार भक्तों की ऐतिहासिक भीड़ उमड़ रही है। इस भीड़ के पीछे एक बड़ा कारण महाकुंभ 2025 भी है। 45 दिनों तक चले प्रयागराज महाकुंभ के चलते उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भक्तों का जमावड़ा रहा।
तीर्थयात्री, जो गंगा स्नान के लिए प्रयागराज आ रहे हैं, वे मिर्जापुर के विंध्यवासिनी धाम में भी दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि महाकुंभ में स्नान के बाद शक्तिपीठों के दर्शन करने से जीवन के सारे दोष समाप्त हो जाते हैं।
यह धाम भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां विंध्यवासिनी त्रिगुणात्मक स्वरूप में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के रूप में पूजी जाती हैं। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय, जब कंस ने उनकी आठवीं संतान को मारने का प्रयास किया, तो योगमाया रूपी कन्या कंस के हाथों से छूटकर विंध्य पर्वत पर प्रकट हुईं और यहीं निवास करने लगीं। तभी से यह धाम सिद्धपीठ और शक्ति उपासना के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध हो गया।
आमतौर पर नवरात्रि में मंदिर में करोड़ों भक्त आते हैं, लेकिन इस बार महाकुंभ के प्रभाव के कारण जनवरी-फरवरी से ही भीड़ बढ़ने लगी है। इस बार श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक संख्या ने इस धाम की लोकप्रियता को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
प्रयागराज आने वाले श्रद्धालु गंगा स्नान के साथ-साथ शक्तिपीठों के दर्शन को भी शुभ मानते हैं। मिर्जापुर, प्रयागराज और वाराणसी को मिलाकर त्रिकोणधाम की यात्रा पूर्ण मानी जाती है इसलिए महाकुंभ में स्नान के लिए आ रहे लोग पहले या बाद में विंध्यवासिनी धाम के दर्शन जरूर कर रहे हैं।
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Updated on:
26 Feb 2025 04:49 pm
Published on:
26 Feb 2025 04:49 pm
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