24 सितंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

विविध भारत
फिसड्डी स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को जोड़कर भविष्य संवारने की एक पहल
Play video

फिसड्डी स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को जोड़कर भविष्य संवारने की एक पहल

समाज में बदलाव की बयार ला रहा एम्स का एक डॉक्टर। हेल्दी एजिंग इंडिया के जरिये बुजुर्गों के अनुभव से नौनिहालों की किस्मत संवारने की मुहिम।
Google source verification

•

image

Amit Kumar Bajpai

•

Aug 17, 2019

नई दिल्ली। आज हम आपके सामने लेकर आए हैं एक ऐसी शख्सियत को जो बुजुर्गों और बच्चों के बीच एक ऐसी कड़ी का काम करते हैं, जिसे जानकर हर कोई ‘वाह’ जरूर कहेगा। वैसे पेशे से तो यह सीनियर डॉक्टर हैं, लेकिन इनका डिपार्टमेंट और काम काबिल-ए-तारीफ है। दरअसल इन्होंने उन बच्चों के बारे में कमाल की योजना बनाई है, जो पढ़ाई में फिसड्डी रहते हैं। और तो और यह फिसड्डी बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। ऐसे बच्चों का मोराल बूस्ट करने वाला, इन्हें संवारने वाला कोई नहीं होता है और यहीं पर डॉक्टर साहब की भूमिका शुरू होती है। यह इन फिसड्डी बच्चों को समझ में ना आने वाले सब्जेक्ट्स को पढ़ाने, समझाने और बढ़ाने की जिम्मेदारी उन बुजुर्गों को सौंपते हैं जो पढ़े लिखे होने के साथ ही ऊंची पोस्ट्स से रिटायर हुए हैं। इनका नाम डॉक्टर प्रसून चटर्जी है और यह एम्स दिल्ली के जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। इन्होंने अपने एनजीओ हेल्दी एजिंग इंडिया के जरिये उम्मीद की एक नई रोशनी फैलाई है।