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ओमान चांडी ने सीएम विजयन को लिखा खत, कहा-मंत्रियों की विदेश यात्रा टाल कर जुटाया जाए धन

कांग्रेस नेता ओमान चांडी सीएम विजयन को खत लिखा है। उन्होंने खत लिख कर कहा कि राज्य के मंत्रियों की प्रस्तावित विदेश यात्रा फिलहाल टाल देनी चाहिए।
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नई दिल्ली

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Shiwani Singh

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Updated: 2 Sep 2018, 11:54 AM IST

oman chandi

ओमान चांडी ने सीएम विजयन को लिखा खत, कहा-मंत्रियों की विदेश यात्रा टाल कर जुटाया जाए धन

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ओमान चांडी ने शनिवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को पत्र लिखर कहा कि मंत्रियों की प्रस्तावित विदेश यात्रा फिलहाल टाल दी जाए। इससे केरल के लिए धन जुटाने में सहायता मिलेगी। साथी ही उन्होंने कहा कि मंत्री विदेश जाने की जगह बाढ़ प्रभावित राज्य में पुनर्वास कार्यक्रम की अगुआई करें। बता दें कि चांडी का यह खत उस समय आया है जब शुक्रवार को विजयन ने घोषणा करते हुए कहा था कि राज्य के मंत्री आर्थिक सहायता लेने के लिए 14 देशों के दौरों पर जाएंगे और उस धन का उपयोग राज्य की पुनस्थापना के लिए किया जाएगा।

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बाढ़ से प्रभावित लोगों का पुनर्वास जल्द से जल्द पूरा करना चरूरी

चांडी ने कहा कि आज सबसे जरूरी काम बाढ़ से प्रभावित हुए 10 लाख से ज्यादा लोगों के पुनर्वास को जल्द से जल्द पूरा करना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य के हर मंत्री को यह सुनिश्चित करना होगा कि जनता को पेयजल, साफ घर, परिसर और स्वास्थ्य सेवाएं एवं जरूरतें उपलब्ध हो रही हैं कि नहीं और इसलिए धन इकट्ठा करने के लिए मंत्रियों की कथित विदेश यात्रा को टाल दिया जाना चाहिए।"

जनता की परेशानियों को सिर्फ नुकसान नहीं मानना चाहिए

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 'अब सुनने में आया है कि जिस 10,000 करोड़ रुपए की राशि को प्रत्येक परिवार को देने की घोषणा की गई है, वह उन्हें नहीं दी जा रही है। यह सही नहीं है और जनता की परेशानियों को सिर्फ नुकसान नहीं मानना चाहिए।' उन्होंने कहा कि और कई घरों में घरेलू और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नष्ट हो गए, इनकी आपूर्ति भी होनी चाहिए। पीड़ितों को अभी तक निशुल्क राशन नहीं मिला है और यह सभी लोगों को कम से कम एक महीने के लिए उपलब्ध कराना चाहिए।

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गौरतलब है कि राज्य में जलप्रलय बाढ़ में 483 लोगों की मौत हो गई है और संपत्ति का अनुमानित नुकसान 37,000 हजार करोड़ रुपए है जो राज्य की वार्षिक व्यय के बराबर है। इस दौरान राज्य के 14.5 लाख लोग 3,000 से ज्यादा राहत शिविरों में थे।