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महाराष्ट्र में उपचुनाव के दौरान नियमों की उड़ीं धज्जियां, प्राइवेट कार से स्ट्रॉन्ग रूम भेजी गईं ईवीएम मशीनें

महाराष्ट्र में लोकसभा उपचुनाव के बाद वीवीपैट और ईवीएम मशीनों को एक चुनाव अधिकारी ने अपनी निजी कार से स्ट्रॉन्गरूम पहुंचाया
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नई दिल्ली

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Siddharth Priyadarshi

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Updated: 29 May 2018, 2:40 PM IST

मुंबई। महाराष्ट्र के पालघर लोकसभा उपचुनाव में सरेआम नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए मतदान समाप्त होने के बाद चुनाव अधिकारी ने वीवीपैट और ईवीएम मशीनों को अपनी निजी कार से मंगलवार सुबह स्ट्रॉन्गरूम पहुंचाया। मामले की जानकारी होते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया।

कार से स्ट्रांग रूम पहुंची मशीनें

हालांकि अभी इस अधिकारी के नाम का खुलासा नहीं किया गया है। लेकिन वह पालघर लोकसभा क्षेत्र के दहानू तालुका के चिंचणी मतदान केंद्र का चुनाव अधिकारी था। जब वह मंगलवार सुबह कई ईवीएम-वीवीपीएटी मशीनों को कार में रखकर स्ट्रॉन्ग रूम में जमा कराने के लिए एआरओ के कार्यालय पहुंचाया तो वहां हड़कंप मच गया। उसके और उस जोन तैनात अन्य अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की गई।

बस आने में देर हुई तो कार से निकल पड़े चुनाव अधिकारी

बताया जा रहा है कि चुनाव के बाद पोलिंग पार्टी को ले आने और ले जाने वाली बस का इंतजार करते हुए जब बहुत देर हो गई तो उस बूथ से संबंधित चुनाव अधिकारी ने अपने घर से कार मंगा ली और उसी में मशीनों को रख कर गंतव्य की ओर चल पड़ा। बताया जा रहा है कि उक्त अधिकारी के साथ कोई पुलिस अधिकारी नहीं था। पालघर के जिला कलेक्टर ने इसे गंभीर चूक मानते हुए बड़ी कार्यवाई की चेतावनी दी है। बता दें कि नियमों के मुताबिक किसी भी चुनाव के बाद ईवीएम और वीवीपैट को इस तरह बिना सरकारी अभिरक्षा के इस तरह कही भी नहीं ले जाया जा सकता।

होगी गंभीर कार्रवाई

घटना की पुष्टि करते हुए पालघर के जिला कलेक्टर प्रशांत नारनवरे ने कहा कि 'चुनाव कार्यालय से रिपोर्ट प्राप्त हुई है और क्षेत्र के सहायक निर्वाचन अधिकारी को घटना की विस्तार से जांच कराने के आदेश दे दिए गए हैं। जिला कलेक्टर ने कहा कि 'इलेक्शन गाइडलाइन्स के अनुसार मतदान खत्म होने के बाद सभी मतदान केंद्रों से सभी वीवीपैट और ईवीएम को लेने के लिए एक विशेष बस भेजी जाती है। हर बस का एक विशेष मार्ग होता है, जिससे होकर उसे गुजरना होता है और मशीनों को लेकर एआरओ के कार्यालय पहुंचाना होता है। इस मामले में साफ है कि संबंधित अधिकारी ने प्रक्रिया का पालन नहीं किया'।