
प्रसिद्ध लिंगायत संत सिद्धलिंग का निधन, दिल का दौरा पड़ने के बाद ली अंतिम सांस
नई दिल्ली। देश ने एक बार फिर महान व्यक्तित्व के धनी और प्रसिद्ध संत को खो दिया है। दक्षिण भारत के साथ ही देश और दुनिया में इस संत ने अपने विचारों से करोड़ों लोगों का दिल जीता। बात कर रहे हैं कर्नाटक के प्रसिद्ध लिंगायत संत सिद्धलिंग स्वामी की जिनका प्रदेश के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र स्थित गदांग में निधन हो गया। सिद्धलिंग स्वामी के तोंतादार्य मठ के एक सदस्य ने शनिवार को यह जानकारी दी। वह 69वर्ष के थे। मठ के सदस्य ने बेंगलूरू से करीब 390 किलोमीटर दूर गदांग में संवाददाताओं को बताया, 'एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने स्वामीजी को शनिवार सुबह मृत घोषित कर दिया। उनको दिल का दौरा पड़ा था।'
संत सिद्धलिंग के निधन की खबर से देश और दुनिया में शोक की लहर है। प्रदेश के मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने संवाददाताओं को बताया कि सुबह नौ बजे जब संत अपने कक्ष से बाहर नहीं आए तो उनको अस्पताल ले जाया गया, जहां हृदयाघात के कारण उनको मृत घोषित कर दिया गया।
ऐसे मिली थी ख्याति
मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के मुताबिक, 'सिद्धलिंग कर्नाटक में सबसे पूजनीय लिंगायत संतों में से एक थे। उन्हें उनकी भाषण-कला के लिए जाना जाता था। उन्होंने समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने के सिद्धारमैया सरकार के फैसले का विरोध करने के लिए वीरशैव-लिंगायत के संतों की आलोचना की थी। संत सिद्धलिंग एक महान लेखक और शिक्षा व साहित्य के संरक्षक थे। 'संत के हजारों भक्त हैं, जो विविध सामाजिक व धार्मिक मुद्दों के प्रति उनके प्रगतिशील व स्पष्टवादी दृष्टिकोण का आदर करते हैं।'
अंधविश्वास के खिलाफ आंदोलन का बने हिस्सा
'स्वामीजी अंधविश्वास के खिलाफ जनांदोलन समेत पर्यावरण और अन्य मसलों को लेकर चलाए जाने वाले आंदोलनों में सक्रिय रहते थे। संत ने 2006-07 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान सिद्धलिंग स्वामी से मिली सलाह को याद किया।
Updated on:
21 Oct 2018 09:14 am
Published on:
21 Oct 2018 09:14 am
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