कृषि लोन के नाम पर हो रहा कंपनियों का भला! RBI के आंकड़े से खुली 'किसान कल्याण' की पोल?

कृषि लोन के नाम पर हो रहा कंपनियों का भला! RBI के आंकड़े से खुली 'किसान कल्याण' की पोल?

सूचना के अधिकार के तहत भारतीय रिजर्व बैंक से मिली जानकारी के मुताबिक 2016 में सरकारी क्षेत्र के बैंकों ने 615 बैंक खातों में कुल 58,561 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हैं।

नई दिल्ली। किसानों आत्महत्या के सिलसिलेवार मामलों के बीच किसानों के नाम पर कृषि लोन की बंदरबांट का मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार के तहत भारतीय रिजर्व बैंक से मिली जानकारी के मुताबिक 2016 में सरकारी क्षेत्र के बैंकों ने 615 बैंक खातों में कुल 58,561 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हैं। इस आंकड़े के हिसाब से प्रत्येक किसान को करीब 95 करोड़ रुपए का कृषि लोन मिला है। इसी तरह के आंकड़े कई सालों के हैं। यह हैरान कर देना वाला आंकड़ा एक बड़े गड़बड़झाले की तरफ इशारा करता है।

2015 में भी किसानों के नाम करोड़ों का लोन

रिपोर्ट्स में विशेषज्ञों के हवाले से दावा किया गया है कि किसानों को दिया जाने वाला यह लोन वास्तव में कृषि से जुड़े व्यवसाय करने वाली कंपनियों के खाते में चले गए हैं। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार ने साल 2014-15 में साढ़े आठ लाख करोड़ का कृषि लोन देने का लक्ष्य रखा था, जिसे 2018-19 के लिए बढ़ाकर 11 लाख करोड़ कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में भी 604 खातों में 52,143 करोड़ यानी हर खाते में 86.33 करोड़ रुपए का लोन दिया गया था।

सरकार बदली हालात नहीं

गौरतलब है कि यह सिलसिला यूपीए सरकार के दौरान भी जारी था। रिपोर्ट के अनुसार साल 2014 में भी 659 खातों में कुल 60 हजार 156 करोड़ रुपए भेजे गए थे। यानी हर खाते में औसतन 91.28 करोड़ रुपए भेजे गए। यानी सरकार भले ही बदल गई हो लेकिन मिल बांटकर खाने का मामला अभी भी बरकरार है।

क्या है कृषि लोन का दायरा

कृषि लोन के लिए महज चार फीसदी की दर से ब्याज देना होता है। कृषि लोन के तहत तीन तरह के प्रावधान हैं। इसमें कृषि, कृषि बुनियादी ढांचे और सहायक गतिविधियों के लिए लोन दिए जाते हैं। बुनियादी ढांचे और सहायक गतिविधियों के लिए सौ-सौ करोड़ तक का प्रावधान है। गौरतलब है कि भारत के सामान्य किसान इसका लगभग एक या दो फीसदी ही लोन लेते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या किसानों के नाम पर कंपनियों का भला किया जा रहा है।

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