
नाम परिवर्तन पर बोले इतिहासकार इरफान हबीब, भाजपा पहले अपने राष्ट्रीय अमित शाह का बदले नाम
नई दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए प्रक्रिया शुरु हो गई है और इस बीच एक बार फिर से जगहों एवं शहरों के नाम बदलने को लेकर राजनीति गरमा गई है। भाजपा सरकार की ओर से कई जगहों के नाम बदलने के बाद सियासी दलों ने विरोध जताया है तो वहीं अब जाने-माने इतिहासकार इरफान हबीब ने भी सरकार के खिलाफ तीखी टिप्पणी की है। हबीब ने सीधे-सीधे कहा कि सबसे पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के नाम को बदलने की जरुरत है। उन्होंने अपने तर्क में कहा कि शाह उनका उपनाम है जो कि फारसी मूल का है, गुजराती नहीं। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को गुजरात का भी नाम बदल देना चाहिए, क्योंकि गुजरात शब्द का उद्भव फारसी भाषा से हुआ है। पहले इसे ‘गुर्जरात्र’ कहा जाता था।
नाम बदलना संघ का ऐजेंडा
बता दें कि इरफान हबीब ने कहा कि भाजपा सरकार देश भर में नाम बदलने का जैसे अभियान चला रही है, जो कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की हिन्दुत्व नीति पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भाजपा और दक्षिणपंथी लोग उन सभी को बदल देना चाहते हैं जो गैर हिन्दू है या इस्लामिक मूल की है।
कहां से आया शाह शब्द
आपको बता दें कि भाषा विज्ञानियों का मानना है कि शाह शब्द मूल रूप से फारसी है, जिसका अर्थ होता है राजा। एक जमाने में शाह उपनाम भारत में अधिकत सैय्यद मुस्लिमों द्वारा लगाया जाता था। दूसरी तरफ संस्कृत भाषा के शब्द साधु से भी शाह शब्द आता है, जिसका अर्थ होता है नेक व्यक्ति। कई दशकों से भारत में शाह उपनाम का इस्तेमाल अधिकतर कारोबारी समुदाय जैसे वैश्य समुदाय करता आया है। इसके अलावा शाह/साह उपनाम गुजरात, राजस्थान और यूपी में जैन और वैष्णव भी करते हैं। शाह उपनाम दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का जैन समुदाय भी इस्तेमाल करता है। इन सबके अलावा यह भी कहा जाता है कि शाह शब्द का मूल हिन्दी के शब्द साहूकार से आया है, जिसका अर्थ होता है पैसे को लेन-देन करने वाला।
Updated on:
11 Nov 2018, 8:20 PM IST
Published on:
11 Nov 2018, 8:20 PM IST
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