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कुमार विश्वास ने ट्विटर पर बुझाया पहेली, लोग बोले यहां ज्ञान न दीजिए, कोर्ट जाइए

आम बजट सत्र में सरकार ने बिना बहस किए हुए फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेग्यूलेशन) एक्ट, 2010 में संशोधन करते हुए बिल पास कर दिया था।
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Chandra Prakash Chourasia

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Updated: 19 Mar 2018, 7:02 PM IST

Kumar Vishwas

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने इस साल आम बजट की आड़ में राजनीतिक दलों को मिलने वाले विदेशी चंदे से जुड़े बिल को पास करा लिया। इसमें विदेशी चंदा (विनियमन) कानून (FCRA) में महत्वपूर्ण बदलाव की व्यवस्था की गई है। इससे सभी राजनीतिक दल बिना किसी रोक-टोक के विदेशी चंदा ले सकेंगे। सरकार की यही उपलब्धि शायद आम आदमी पार्टी को रास नहीं आ रही। आज आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास को सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। कुमार विश्वास ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए लिखा कि, 'बिना बिके-झुके, लोकतंत्र के इस तथाकथित मंदिर में शायद कोई आया ही नहीं है सो अंदर ही अंदर बने, इस निहायत बेशर्म क़ानून के ख़िलाफ़,कोई बोलेगा भी नहीं ! दरबारियों के चमचाच्छादित अदृश्य कपड़े पहने हर राजा ***** है ! पक्ष-विपक्ष-निरपेक्ष !'

मजाक बना कुमार विश्वास का ट्वीट

ट्वीटर पर कुमार विश्वास को यह ट्वीट करना महंगा पड़ गया। वो ट्विटर पर अपने ही समर्थकों के बीच घिर गए। ट्विटर पर एक यूजर्स ने लिखा, ‘कुमार भाई मैं आपका बहुत सम्मान करता हूं। आर्थिक या सामाजिक रूप से इस बेशर्म कानून को अदालत में चुनौती नहीं दे सकता। आप क्यों नहीं इसके खिलाफ याचिका दायर करते हैं? जमीन पर उतरिये और ट्विटर पर बोलने का काम हम जैसे लोगों पर छोड़ दीजिए।’ वहीं एक दूसरे यूजर्स ने ट्वीट करके लिखा, ‘इस लोकतंत्र में सारे नियम-कानून आम जनता के लिए हाते हैं। वर्षों से चली आ रही प्रथा आज भी चल रही है। पहले राजा अपनी मर्जी से काम करता था। अब हमारे नेता लोग। सैलरी बढ़ानी हो या चंदा सारी पार्टियां एक हो जाती हैं। ये सेवक बन सिर्फ मावा खाना चाहते हैं।’

बिना रोक-टोक विदेशों से ले सकेंगे चंदा

गौरतलब है कि आम बजट सत्र में सरकार ने बिना बहस किए हुए फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेग्यूलेशन) एक्ट, 2010 में संशोधन करते हुए बिल पास कर दिया था। पहले इस एक्ट में भारतीय राजनीतिक दलों को विदेशी कंपनियों से चंदा लेने पर रोक थी। इस संशोधन से बीजेपी और कांग्रेस दोनों आरोप मुक्त हो गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने 2014 के एक फैसले में दोनों दलों को गैरकानूनी ढंग से चंदा लेने का दोषी ठहराया था। सरकार ने राजनीतिक चंदे से जुड़े एक्ट को पिछली तारीख से संशोधित कर दिया है।