नई दिल्ली। आज से करीब 58 साल पहले यानि 1960 में वैज्ञानिकों ने पहली बार मरे हुए इंसानों को फिर से ज़िंदा करने के लिए काम करना शुरु कर दिया था। वैज्ञानिकों की इस कोशिश को दुनिया भर के लोगों ने मज़ाक बताया था। क्योंकि हम इस बात पर कतई भरोसा नहीं करेंगे कि एक इंसान मरने के बाद ज़िंदा हो भी सकता है। लेकिन हम ये बात भी नहीं भूल सकते कि जिन वैज्ञानिकों की कोशिशों को हमने पहले भी बेवकूफी बताया था, आज हम उन्हीं की देन और तकनीक पर मौज काट रहे हैं।