
मुरादाबाद: बीते सप्ताह कुशीनगर में सड़क हादसे में एक दर्जन से अधिक स्कूली बच्चों की मौत के बाद भी अभी जिम्मेदार अधिकारीयों की नींद नहीं टूटी है। जी हां आज जनपद के छजलैट थाना क्षेत्र में ऐसा ही हादसा होने से बचा। यहां बच्चों से भरी बस हाई टेंशन लाइन के विधुत पोल से जा टकराई। इसमें कई बच्चों को चोटें आईं,जबकि दो बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है। गुस्साए परीजनों ने स्कूल प्रबन्धन के खिलाफ थाने में शिकायत की है। परिजनों के अनुसार बस बेहद खटारा थी। कई बार प्रबन्धन को चेताया भी लेकिन स्थानीय प्रशासन की हवाहवाई चेकिंग से ये हादसा हो गया। गनीमत ये रही की सभी बच्चे और चालक सुरक्षित हैं।
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अगर उतर आता करंट तो हो जाता बड़ा हादसा
जानकारी के मुताबिक अगवानपुर दिल्ली रोड बाईपास पर सेंट मेरी स्कूल की बस छुट्टी के वक्त बच्चों को लेकर वापस आ रही थी तब ये हादसा हुआ। बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि जिस वक्त बस हादसे का शिकार हुई उस वक्त हाईटेंशन लाइन में बिजली चालू थी और बिजली का तार हादसे की वजह से टूट जाता तो बच्चों की जान पर बन आती। आक्रोशित अभिभावकों के मुताबिक उनके द्वारा स्कूल प्रबंधन को कई बार खटारा हो चुकी बसों को बदलने का आग्रह किया गया। लेकिन कभी भी उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। अभिभावकों का आरोप है की स्कूल प्रबंधन द्वारा जो बसें बच्चों को मुहैया कराई गई है उनमें से ज्यादातर की हालत सड़क पर चलने लायक नहीं है। कई बार स्कूल प्रबन्धन से इस बारे में कहा भी गया।
स्कूल वाहनों की चेकिंग के दावे हवाहवाई
अभिभावकों ने थाना प्रभारी छजलैट को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई करने की मांग की है। अभिभावकों ने शिकायत की है कि अगर स्कूल प्रबंधन समय रहते उनकी बात मान लेता तो आज यह हादसा होने से टाला जा सकता था। पुलिस ने परिजनों की तहरीर लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है की कुशीनगर हादसे के बाद जिला प्रशासन द्वारा स्कूली बसों को लेकर जो अभियान चलाए गए थे। क्या वो महज सब कुछ सही होने का दिखावा था।
Published on:
4 May 2018, 10:12 PM IST
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