मूलरूप से छजलैट के गांव फूलपुर के रहने वाले मोहम्मद यूनुस का परिवार जयंतीपुर में पुलिस चौकी के पास सलीम कुरैशी के मकान में किराए पर रहता है। यूनुस रिक्शा चलाता था, लेकिन टीबी की बीमारी होने के बाद वह एक ठेकेदार के साथ पुणे चला गया। जहां वह चाय-बिस्किट का ठेला लगाता है। उसकी पत्नी अमीर जहां (34) यहां अपनी तीन बेटियों तबस्सुम (14), रहनुमा (12) और मुस्कान (10) के साथ रहती थी। तबस्सुम ने बताया कि इस बार उसके पिता ढाई महीने से घर नहीं आए हैं। इसलिए पैसे खत्म हो गए और घर में राशन तक नहीं बचा था। तीनों बहनों ने बताया कि उन्होंने तीन दिन से कुछ नहीं खाया था। कल रात बच्चियों के सिसकने की आवाज सुनकर सामने रहने वाली शबाना उन्हें छह रोटियां दे गई। शबाना का कहना है कि बच्चियों ने तो रोटी खा ली, लेकिन काफी कहने के बाद भी अमीरजहां ने कुछ नहीं खाया। गुरुवार सुबह अचानक उसकी तबियत ज्यादा बिगड़ गई।