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MP Election 2023 : चंबल का चुनावी माहौल, दिमनी सबसे हॉट सीट

इस बार चुनाव में चंबल किसे चुनेगा ? कमल खिलेगा या फिर हाथ को जनता का साथ मिलेगा। साइकिल कहां सेंध लगाएगी, हाथी कहां खेल बिगाड़ेगा और झाड़ू किसका सफाया करेगी ? जानिए चंबल का चुनावी गणित...।

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MP Election 2023 : चंबल का चुनावी माहौल, दिमनी सबसे हॉट सीट

वैसे तो चंबल की पहचान बंदूक और बीहड़ से होती है। लेकिन, इन दिनों बीहड़ों में भी चुनावी चर्चाएं जोरों पर हैं। चर्चा है, इस बार चुनाव में चंबल किसे चुनेगा? कमल खिलेगा या फिर हाथ को जनता का साथ मिलेगा। साइकिल कहां सेंध लगाएगी, हाथी कहां खेल बिगाड़ेगा और झाड़ू किसका सफाया करेगी ? एक तरफ जनता है जो सीधे मुद्दों की बात कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ पार्टियों के कार्यकर्ता और नेता जो अपनी अपनी जीते के दावे कर रहे हैं। चुनाव का वक्त नजदीक आ रहा है। सरगर्मियां बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में पत्रिका.कॉम ने जब चंबल संभाग की नब्ज टटोलने के लिए यहां पर जमीनी हकीकत टटोली तो पाया हर जिले की तासीर अलग है। कहीं जातिगत फैक्टर हैं तो कहीं प्रत्याशी का चेहरा ही जीत की गारंटी है तो चलिए जानते हैं इस बार कैसा है चंबल संभाग का चुनावी मिजाज।


चंबल संभाग में 3 जिले 13 विधानसभा सीटें

चंबल संभाग में भिंड, मुरैना और श्योपुर तीन जिले हैं। इन तीनों जिलों में कुल मिलाकर 13 विधानसभा सीटें हैं। भिंड में जिले की अगर बात करें तो भिंड में 5 विधानसभाएं भिंड, अटेर, गोहद, लहार और मेहगांव हैं। मुरैना जिले में 6 विधानसभा सीटें हैं जिनमें से दिमनी इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चाओं में है वजह है दिमनी से भाजपा के कद्दावर नेता और केन्द्र सरकार के मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का चुनावी मैदान में होना। दिमनी के अलावा मुरैना जिले में सबलगढ़, जौरा, सुमावली, मुरैना और अंबाह सीटें आती हैं। संभाग का तीसरा जिला है श्योपुर जिसमें दो विधानसभा सीटे हैं श्योपुर और विजयपुर।


जिलेवार समझिए चंबल संभाग का चुनावी गणित

क्या है चंबल संभाग के मुरैना जिले का चुनावी माहौल ?

मुरैना जिले की बात करें तो यहां चुनावी माहौल टाइट है। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी जिले की राजनीति विकास की जगह जातिवाद पर टिकी नजर आ रही है। जिले की अंबाह सीट रिजर्व है इसलिए यहां लोगों का ज्यादा ध्यान नहीं है जिस सीट पर सबसे ज्यादा फोकस और चुनावी माहौल बना हुआ है वो है दिमनी विधानसभा। चलिए बात करते हैं। किस राजनीतिक दल ने अब तक जिले की 6 विधानसभा सीटों में से कितनी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

भाजपा 6 में से 4 सीटों पर कर चुकी है प्रत्याशियों का ऐलान

-मुरैना जिले की दिमनी विधानसभा : नरेंद्र सिंह तोमर बने प्रत्याशी घोषित किया

इसी के साथ मुरैना जिले के अंतर्गत आने वाली एक और दिलचस्प विधानसभा दिमनी से भाजपा ने केंद्रीय मंत्री और पार्टी के दिग्गज नेता नरेंद्र सिंह तोमर को प्रत्याशी घोषित किया है। दिमनी की चर्चा न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश और देश में हो रही है और इसकी वजह है दिमनी से भाजपा की ओर से केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को प्रत्याशी बनाया जाना। अभी तक प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाले नेताओं में शुमार नरेन्द्र सिंह तोमर इस बार खुद चुनावी मैदान में हैं।


- मुरैना जिले की मुरैना विधानसभा सीट : रघुराज कंसाना को मिला टिकट

वहीं, मुरैना जिले के अंतर्गत आने वाली मुरैना विधानसभा से भाजपा ने रघुराज कंसाना को टिकट देकर प्रत्याशी घोषित किया है। मुरैना सीट गुर्जर बाहुल्य है और यही वजह है कि यहां चुनावों में गुर्जर समाज के ही प्रत्याशी जीत दर्ज करते आए हैं। वर्तमान में मुरैना से कांग्रेस से अजब सिंह कुशवाह विधायक हैं।


-मुरैना जिले की सबलगढ़ विधानसभा : सरला विजेंद्र रावत को उतारा

जिले की सबलगढ़ विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने सरला विजेंद्र रावत को प्रत्याशी के तौर पर उतारा है। इस सीट पर साल 2018 से कांग्रेस के बैजनाथ कुशवाह विधानसभा सदस्य हैं। उस बार भी रावत भाजपा की उम्मीदवार थीं। तब रावत तीसरे स्थान पर आईं थीं। फिर भी जीत का अंतर 10 हजार वोट से कम था।


-मुरैना जिले की सुमावली विधानसभा : एंदल सिंह कंसाना मैदान में

मुरैना जिले की सुमावली विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री एंदल सिंह कंसाना को टिकट दिया है। यहां की लड़ाई बेहद दिलचस्प है। कंसाना 2018 में कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। उन्होंने भाजपा के अजब सिंह कुशवाह को हराया था। लेकिन, ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थकों में से एक कंसाना ने भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ले ली। इसके बाद 2020 के उपचुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट दे दिया। इससे नाराज हुए अजब सिंह कुशवाह भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ गए। इधर, उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने अजब सिंह को टिकट दे दिया। जब उपचुनाव के नतीजे सामने आए तो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े कुशवाह ने कंसाना को हरा दिया। हालांकि, उस समय हार का अंतर दस हजार वोटों से भी कम था। ऐसे में भाजपा ने एंदल सिंह कंसाना को एक बार फिर इसी सीट से प्रत्याशी चुना है।

'AAP' ने 6 में से 2 सीटों पर कर चुकी है प्रत्याशियों का ऐलान

वहीं, दूसरी तरफ मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के रण में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी द्वारा भी बीते 8 सितंबर की शाम को 10 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की गई है। इनमें चंबल संभाग के अंतर्गत आने वाली मुरैना जिले की मुरैना विधानसभा से रमेश उपाध्याय को प्रयाशी बनाया है, जबकि दिमनी विधानसभा से सुरेंद्र सिंह तोमर को प्रत्याशी घोषित किया है। हालांकि, इन दोनों ही सीटों पर मौजूदा समय में कांग्रेस के विधायकों का कब्जा है।


- मुरैना विधानसभा सीट : रमेश उपाध्याय पर खेला दाव

मुरैना विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी ने रमेश उपाध्याय पर दाव खेलते हुए उन्हें उम्मीदवार घोषित किया है। रमेश उपाध्याय वर्तमान में नगर निगम के पार्षद हैं और कांग्रेस की परिषद में एमआइसी सदस्य भी हैं। हालांकि, मौजूदा समय में इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। कांग्रेस के राकेश मावई फिलहाल यहां से मौजूदा विधानसभा सदस्य हैं। जबकि, भाजपा ने भी इस सीट से प्रत्याशी के तौर पर रघुराज कंसाना को उतारा है।


- दिमनी विधानसभा सीट : तोमरों के गढ़ में सुरेंद्र सिंह तोमर बने प्रत्याशी

दिमनी विधानसभा तोमरों का बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। यही कारण है कि, यहां से हर बार तोमर बिरादरी का ही उम्मीदवार चुनकर मध्य प्रदेश विधानसभा में पहुंचता है। यही कारण है कि, इस विधानसभा सीट पर सभी राजनीतिक दल तोमर कैंडिडेट को ही चुनावी मैदान में उतारती हैं। आम आदमी पार्टी ने इस बार इस सीट से सुरेंद्र सिंह तोमर को प्रत्याशी घोषित किया है। सुरेंद्र सिंह तोमर क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारी हैं। जबकि भारतीय जनता पार्टी ने इसके बाद दिमनी सीट पर अपना रामबाण माने जाने वाले केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को टिकट दे दिया है। वहीं, दिमनी विधानसभा से कांग्रेस के रविंद्र सिंह तोमर मौजूदा विधायक हैं। फिलहाल, इस सीट पर मुकाबला बेहद रोचक होने वाला है।


बसपा 6 में से 1 सीट पर कर चुकी है प्रत्याशी का ऐलान

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने भी अबतक उम्मीदवारों की दो सूचियां जारी कर दी हैं। 10 अगस्त 2023 की शाम जारी की गई 7 प्रत्याशियों के नामों की पहली सूची में उत्तर प्रदेश की सीमा से लगी विधानसभा सीटों पर बसपा का फोकस रहा। 7 प्रत्याशियों में से 3 उम्मीदवार ब्राह्मण, 1 दलित, 1 ठाकुर है, जबकि दो प्रत्याशी पटेल समुदाय से आते हैं। हालांकि, पहली सूची में चंबल संभाग के अंतर्गत आने वाले मुरैना जिले की सिर्फ एक दिमनी सीट से उम्मीदवार घोषित किया था।


- दिमनी विधानसभा सीट : बसपा ने दंडोतिया को बनाया प्रत्याशी

मुरैना जिले की दीमनी विधानसभा सीट से बलबीर सिंह दंडोतिया को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है। 2013 में इस सीट से वे विधायक रह चुके हैं। वर्तमान में यह सीट कांग्रेस के कब्जे में है। रविंद्र सिंह तोमर यहां से विधायक हैं। खास बात ये है कि, बलवीर सिंह दंडोतिया कांग्रेस से इस्तीफा देकर बसपा में शामिल हुए हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि, दंडोतिया इस बार दिमनी सीट से कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। ये भी बता दें कि पिछली बार के चुनाव में दंडोतिया बसपा से ही इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हुए थे।

मुरैना जिले में विधानसभा वार मतदाता

सबलगढ़ - कुल मतदाता - 2 लाख 33 हजार 906, इनमें 1 लाख 24 हजार 688 पुरुष और 1 लाख 9 हजार 215 महिला मतदाता।

जौरा - कुल मतदाता - 2 लाख 62 हजार 630, इनमें 1 लाख 41 हजार 80 पुरुष और 1 लाख 21 हजार 542 महिला मतदाता।

सुमावली - कुल मतदाता - 2 लाख 56 हजार 657, इनमें 1 लाख 40 हजार 160 पुरुष और 1 लाख 16 हजार 296 महिला मतदाता।

मुरैना - कुल मतदाता - 2 लाख 62 हजार 865, इनमें 1 लाख 42 हजार 428 पुरुष और 1 लाख 20 हजार 428 महिला मतदाता।

दिमनी - कुल मतदाता - 2 लाख 30 हजार 520, इनमें 1 लाख 24 हजार 916 पुरुष और 1 लाख 5 हजार 604 महिला मतदाता।

अंबाह - कुल मतदाता - 2 लाख 37 हजार 319, इनमें 1 लाख 26 हजार 448 पुरुष और 1 लाख 10 हजार 867 महिला मतदाता।

क्या है मुरैना जिले की जनता की आवाज ?

1- शहर में नेशनल हाईवे पर बने फ्लाईओवर की लंबाई बढ़ाकर धौलपुर साइड आरटीओ चेकपोस्ट और ग्वालियर साइड छौंदा टोल टैक्स तक पहुंचाई जानी चाहिए।

2- शहर के चारों तरफ एक रिंग रोड बने, ताकि अंबाह-पोरसा, जौरा-कैलारस और शहर से ग्वालियर-आगरा जाने वाले वाहन शहर के अंदर आए बिना सीधे बाहर जा सकें।

3- नगर निगम सीमा के चारों तरफ 4 अलग-अलग जोन ऑफिस बनाए जाएं, ताकि निगम में जुड़ी 12 पंचायतों के लोगों को टैक्स, भवन निर्माण, नामांतरण जैसे कामों के लिए 5 से 7 किलो मीटर दूर निगम ऑफिस के चक्कर न काटना पड़े।

4- रामपुर कलां इलाके की 12 पंचायतों में पेयजल और सिचाई के लिए लिफ्ट एरीगेशन के जरिए क्वारी नदी का पानी पहुंचाया जाना चाहिए।

5- जिले में स्थित 108 गौशालाओं का संचालन उद्योगपतियों के सहयोग से संचालित हो, ताकि सड़कों पर घूमने वाले आवारा गौवंश से 20 लाख की आबादी और किसानों को राहत मिल सके।

6- मुरैना जिला कृषि प्रधान है। इसलिए यहां कृषि कॉलेज और उच्च तकनीकी या व्यवसायिक शिक्षण संस्थान की स्थापना होना चाहिए। ताकि युवाओं में इन क्षेत्रों का ज्ञान बढ़े।

7- कैलारस स्थित शुगर मिल को सरकार चालू कराए, ताकि 10 हजार कर्मचारियों और 50 हजार से अधिक गन्ना उत्पादक किसानों को रोजगार के साथ साथ नकद फसल भुगतान से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

8- अंबाह-पोरसा से शहर को जोड़ने वाले लालौर फाटक और शिकारपुर रेलवे क्रॉसिंग पर फ्लाईओवर का निर्माण होना चाहिए।

9- शहर से ग्वालियर, अंबाह-पोरसा, जौरा - कैलारस - सबलगढ़ और धौलपुर जाने वाली बसों के लिए शहर से बाहर 4 अलग-अलग बस स्टैंड बनें, ताकि शहर के बैरियर और एमएस रोड पर ट्रैफिक जाम से निजात मिल सके।

10- रेलवे स्टेशन के मालगोदाम को शहर से बाहर शिफ्ट करना चाहिए, ताकि शहर में भारी मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर रोक लग सके और लोगों को शहर में आवजाही में राहत हो।

क्या है चंबल संभाग के भिंड जिले का चुनावी माहौल ?

कभी अपनी कड़क बोली और गोली के लिए मशहूर भिंड जिला अब राजनीति के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। लेकिन राजनीति के लिए विकास उतना जरूरी नहीं है, जितना वजन यहां जातिवाद को मिलता है। सुरक्षित सीट को छोड़ दें तो ज्यादातर सीटों पर पिछले 40 साल में ज्यादातर क्षत्रिय और ब्राह्मण प्रत्याशियों ने ही जिले की पांचों विधानसभाओं में जीत हासिल की है।

हालांकि, मेहगांव कभी-कभार उलटफेर करता रहा है। लहार में जहां साल 1990 से एकक्षत्र वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह का कब्जा है तो भिंड में भाजपा, कांग्रेस के बीच ही अधिकांश मुकाबले हुए और 2018 के चुनाव को छोड़ दें तो ज्यादातर भाजपा और कांग्रेस के ही विधायक बने। हर विधानसभा क्षेत्र से अलग-अलग कार्यकाल में जीते विधायक राज्य सरकार में भी शामिल हुए। वहीं, बीते लंबे समय से नेता प्रतिपक्ष का पद ज्यादातर भिंड के पास ही है। इनमें चाहे सत्यदेव कटारे और चौधरी राकेश सिंह रहे हों या मौजूदा समय में डा. गोविंद सिंह हैं। चलिए बात करते हैं। किस राजनीतिक दल ने अब तक जिले की 5 विधानसभा सीटों में से कितनी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं।


भाजपा 5 में से 2 सीटों पर कर चुकी है प्रत्याशियों का ऐलान

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तीन सूचियों में से दो सूचियों के जरिए भिंड जिले की पांच में से दो विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान किया है। इनमें गोहद विधानसभा से लालसिंह आर्य को प्रत्याशी बनाया गया है। जबकि, लहार विधानसभा सीट ले अमरीश शर्मा गुड्डू को प्रत्याशी बनाया है। आइये जाने इन उम्मीदवारों से जुड़ी कुछ खास बातें...।


-भिंड जिले की गोहद विधानसभा : लालसिंह आर्य बने प्रत्याशी

भिंड में गोहद (अजा) में सिंधिया खेमे को झटका लगा है। सिंधिया के साथ भाजपा में आए रणवीर जाटव 2020 के उपचुनाव में अपनी सीट कायम नहीं रख सके थे। अब भाजपा ने भाजपा अजा मोर्चा के बड़े नेता और पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य पर फिर भरोसा जताते हुए प्रत्याशी के तौर पर यहां से उतारा है। आर्य इस सीट पर 2013 में विधायक रहे हैं और राज्यमंत्री भी रहे थे।


- भिंड जिले की लहार विधानसभा : अमरीश शर्मा गुड्डू बने प्रत्याशी

इसके अलावा, भिंड जिले के पांच विधानसभा सीटों में से एक लहार सीट से भाजपा ने अमरीश शर्मा गुड्डू को प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा है।

'AAP' 5 में से 2 सीटों पर कर चुकी है प्रत्याशियों का ऐलान

आम आदमी पार्टी ने अबतक मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के लिए उम्मीदवारों की दो सूचियां जारी की है। इनमें पहली सूची में भिंड जिले की किसी सीट से उम्मीदवार नहीं उतारा, जबकि दूसरी लिस्ट में दो उम्मीदवारों की घोषणा की है। 2 अक्टूबर 2023 की रात विधानसभा प्रत्याशियों के नामों की दूसरी लिस्ट में भिंड जिले की पांच में से दो विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए। इनमें भिंड विधानसभा सीट से राहुल कुशवाह को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया तो वहीं मेहगांव विधानसभा सीट से सतिंदर भदोरिया को प्रत्याशी घोषित किया है। आइये जाने इन उम्मीदवारों से जुड़ी कुछ खास बातें...।


- भिंड जिले की भिंड विधानसभा सीट : राहुल कुशवाह बने प्रत्याशी

आम आदमी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा जारी सूची के अनुसार भिंड जिले की भिंड विधानसभा सीट पर राहुल कुशवाह को प्रत्याशी घोषित किया है।

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- भिंड जिले की मेहगांव विधानसभा सीट : सतिंदर भदोरिया बने उम्मीदवार

वहीं, भिंड जिले की ही मेहगांव विधानसभा से सतिंदर भदोरिया को चुनावी मैदान में उतारा गया है। हालांकि, पहली और दूसरी लिस्ट पर गौर करें तो अब तक आम आदमी पार्टी ने चंबल संभाग से कुल चार प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया है।


बसपा 5 में से 1 सीट पर कर चुकी है प्रत्याशी का ऐलान

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने भी अबतक उम्मीदवारों की दो सूचियां जारी कर दी हैं। दूसरी सूची में भिंड जिले की भिंड विधानसभा सीट से प्रत्याशी के तौर पर रक्षपाल सिंह को मैदान में उतारा है। आइये जाने उनसे जुड़ी कुछ खास बातें...।


- भिंड विधानसभा सीट : बसपा ने रक्षपाल सिंह को बनाया प्रत्याशी

बसपा ने भिंड जिले के अंतर्गत आने वाली भिंड विधानसभा सीट से रक्षपाल सिंह कुशवाह को प्रत्याशी के तौर पर उतारा है। बहुजन समाज पार्टी में दूसरी सूची में भिंड सदर से प्रत्याशी के तौर पर रक्षपाल सिंह को उम्मीदवार घोषित किया है। रक्षपाल सिंह बीते 15 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने भाजपा छोड़कर बसपा ज्वाइन की है।


सपा 5 में से 1 सीट पर कर चुकी है प्रत्याशी का ऐलान

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर अखिलेश यादव की समाज वादी पार्टी ने अगस्त में ही 23 और 27 तारीख को दो सूचियां जारी की थीं। दोनों सूचियों के जरिए अबतक सपा कुल 6 उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। हालांकि, इनमें सिर्फ पहली सूची में ही भिंड जिले की मेहगांव सीट से उम्मीदवार घोषित किया गया है। पार्टी ने जिले की मेहगांव विधानसभा सीट से डॉ. बृजकिशोर सिंह गुर्जर को मैदान में उतारा है। आइये जाने उनसे जुड़ी कुछ खास बातें...।


- मेहगांव विधानसभा सीट : सपा ने डॉ. बृजकिशोर सिंह गुर्जर को बनाया उम्मीदवार

भिंड जिले के अंतर्गत आने वाली मेहगांव विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने डॉ. बृजकिशोर सिंह गुर्जर को उम्मीदवार के तौर पर मैंदान में उतारा है। बता दें कि, बृजकिशोर सिंह समाजवादी पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। हालांकि, इस बार के चुनाव में उन्हें पार्टी ने पहली बार चुनाव लड़ाने के लिए उतारा है।


भिंड जिले में विधानसभा वार मतदाता

वैसे तो भिंड जिले में कुल 12 लाख 85 हजार 165 मतदाता है। इनमें 6 लाख 97 हजार 312 पुरुष है, जबकि 5 लाख 87 हजार 832 महिला मततादाता है। विधानसभा वार समझें तो...।

अटेर - यहां 1 लाख 29 हजार 368 पुरुष हैं, जबकि 1 लाख 8 हजार 657 महिला मतदाता हैं। यहां कुल 2 लाख 38 हजार 29 मतदाता हैं।

भिंड - यहां 1 लाख 46 हजार 763 पुरुष हैं, जबकि 1 लाख 24 हजार 852 महिला मतदाता हैं। यहां कुल 2 लाख 71 हजार 617 मतदाता हैं।

लहार - यहां 1 लाख 40 हजार 426 पुरुष हैं, जबकि 1 लाख 18 हजार 42 महिला मतदाता हैं। यहां कुल 2 लाख 59 हजार 276 मतदाता हैं।

मेहगांव - यहां 1 लाख 51 हजार 239 पुरुष हैं, जबकि 1 लाख 26 हजार 78 महिला मतदाता हैं। यहां कुल 2 लाख 77 हजार 319 मतदाता हैं।

गोहद - यहां 1 लाख 29 हजार 516 पुरुष है, जबकि 1 लाख 1 हजार 403 महिला मतदाता हैं। यहां कुल 2 लाख 38 हजार 924 मतदाता हैं।


क्या है भिंड जिले की जनता की आवाज ?

1- जिले में कम से कम 6 फ्लाईओवर होना चाहिए, रेलवे क्रॉसिंग, लहार रोड, सुभाष तिराहे से इंदिरा गांधी चौराहे तक फ्लाईओवर बनने चाहिए।

2- औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर को मिलने वाले अनुदान का हिस्सा भिंड में भी खर्च होना चाहिए।

3- जिला नदियों से घिरा हुआ है। यहां डैम बनाकर विद्युत उत्पादन की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे न सिर्फ जिले की बिजली जरूरतों की आपूर्ति होगी, बल्कि हम अन्य राज्यों को बिजली बेचने में भी सक्षम होंगे।

4- प्रदेश में सबसे ज्यादा शहीद भिंड जिले में हैं। यहां राष्ट्रीय नहीं तो कम से कम प्रदेश स्तर का शहीद स्मारक बनाया जाना चाहिए।

5- जिले में उच्च तकनीकी या व्यावसायिक शिक्षण संस्थान की स्थापना होनी चाहिए।

6- गो-अभयारण्य बनना चाहिए, ताकि फसलें सुरक्षित हो सकें और किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सके।

7- मध्य प्रदेश के सभी जिलों के प्रधान और जिला सत्र न्यायाधीशों को मानवाधिकार आयोग के सचिव का दर्जा दिये जाने पर चर्चा है, लेकिन अधिकारों का हस्तांतरण अबतक नहीं हो सका है, इससे जिले पर ही मानव अधिकारों पर सुनवाई हो सकेगी।

8- अमायन क्षेत्र 33 साल से नहर का मुद्दा का लंबित है। घोषणाएं हुईं, आवास बने, पर अबतक नहर नहीं आई।

9- नगर निगम के गठन की घोषणा तो हुई है। लेकिन, अबतक इसपर अमल नहीं हुआ। इस आवश्यक मुद्दे पर शीघ्रता बरतनी चाहिए और सुचारू संचालन किया जाना चाहिए।

10- शहर की यातायात और यात्री परिहवन व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए।

11- विधायकों की पेंशन बंद होनी चाहिए।

12- तहसील मुख्यालय होने से अटेर में सिविल न्यायालय शुरू होना चाहिए।

13- भिंड और अटेर के किले को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

14- अपर कमिश्नर और डीआईजी का मुख्यालय भिंड में किया जाना चाहिए।

क्या है चंबल संभाग के श्योपुर जिले का चुनावी माहौल ?

जिले की दोनों सीटों पर जातिगत फेक्टर करता है चुनाव को प्रभावित

राजस्थान सीमा से सटे मध्य प्रदेश के पिछड़े जिले श्योपुर में दो विधानसभा सीटें हैं, जिनपर हर विधानसभा चुनाव में समीकरण बदलते और बिगड़ते रहे हैं। कभी चेहरे तो कभी जातिगत फेक्टर पर चुनावों को प्रभावित करता है। कहने को जिले में दो ही विधानसभा सीटें हैं, लेकिन दोनों की परिस्थतियां बिल्कुल भिन्न हैं।


-श्योपुर विधानसभा की जमीनी हालात

इनमें श्योपुर विधानसभा सीट की बात करें तो यहां अभी तक कोई भी मौजूदा विधायक लगातार दूसरी बार चुनाव नहीं जीता। यानी यहां हर बार बदलाव होता रहा है। मीणा जाति (लगभग 50 हजार) के मतदाताओं के बाहुल्य वाली इस सीट पर वर्तमान में कांग्रेस के बाबू जंडेल विधायक हैं और इसी जातिगत फेक्टर और पिछले चुनाव में 42 हजार की जीत का अंतर होने से इनका टिकट इस बार भी कंफर्म माना जा रहा है। वहीं, भाजपा ने अपने पुराने प्रत्याशी पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय पर ही भरोसा जताया है।


-विजयपुर विधानसभा के जमीनी हालात

बात करें विजयपुर विधानसभा सीट की तो ये एक आदिवासी बाहुल्य सीट है। यहां लगभग 52 हजार आदिवासी मतदाता हैं। यही कारण है कि पिछले चुनाव में भाजपा ने आदिवासी कार्ड खेला और सीताराम आदिवासी को प्रत्याशी बनाकर उतारा तो उन्होंने यहां स्थाई सीट बना चुके कांग्रेस के रामनिवास रावत को हरा दिया। हालांकि, इस बार सीताराम का टिकट असमंजस में है, लेकिन भाजपा फिर से आदिवासी पर ही दांव खेलने की तैयारी में हैं, जबकि विधानसभा में हो रही चर्चाओं पर गौर करें तो कांग्रेस एक बार फिर यहां रामनिवास रावत को टिकट देने की तैयारी करती दिख रही है।


जिले के 5 लाख 13 हजार 128 मतदाता चुनेंगे सरकार

जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 5 लाख 13 हजार 128 हो गई है। जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 2 लाख 66 हजार 839 तथा महिला मतदाताओं की संख्या 2 लाख 46 हजार 287 है, इसके अतिरिक्त 2 थर्ड जेंडर वोटर हैं। वहीं, 149 सर्विस वोटर है। जिले में इस बार 7 मतदान केंद्र नए बनाए गए हैं। इस प्रकार अब 656 मतदात केंद्र हो गए हैं।


श्योपुर जिले में विधानसभा वार मतदाता

श्योपुर विधानसभा - कुल मतदाता 2 लाख 59 हजार 424 हैं, जिसमें पुरुष मतदाता 1 लाख 33 हजार 579 हैं, महिला मतदाता 1 लाख 25 हजार 843 हैं। विजयपुर विधानसभा - कुल मतदाता 2 लाख 53 हजार 704 हैं, जिसमें पुरुष मतदाता 1 लाख 33 हजार 260 है, जबकि महिला मतदाता 1 लाख 20 हजार 443 हैं।

जिले की दो में से एक विधानसभा सीट पर भाजपा ने किया उम्मीदवार का ऐलान

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तीन सूचियों में से एक सूची के जरिए श्योपुर जिले की दो में से एक विधानसभा सीट पर ही प्रत्याशी का ऐलान किया है। इनमें श्योपुर विधानसभा सीट से दुर्गालाल विजय को प्रत्याशी बनाया गया है। आइये जाने उनसे जुड़ी खास बातें...।


- श्योपुर जिले की श्योपुर विधानसभा सीट : दुर्गालाल विजय को मिला टिकट

श्योपुर जिले के अंतर्गत आने वाली श्योपुर विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी ने दुर्गालाल विजय को टिकट दिया है। विधायक दुर्गालाल विजय को भाजपा ने पांचवीं बार टिकट दिया है। पहला टिकट उन्हें 1993 में विजयपुर से मिला था, जिसमें वो रामनिवास रावत से करीब 8 हजार वोटों से चुनाव हारे थे। इसके बाद भाजपा ने उन्हें 2003 दोबारा टिकट दिया, जिसमें वो चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। इसके बाद से लगातार उनका टिकट लेने का सिलसिला बना हुआ है। 2008 के चुनाव में उन्हें हार मिली, जबकि 2013 के चुनाव में वो फिर से 16 हजार वोटों से जीतकर दूसरी बार विधायक बने।


भाजपा का सिर्फ एक प्रत्याशी घोषित, बाकि किसी दल ने घोषित नहीं किए उम्मीदवार

हालांकि, इसके अलावा प्रदेश में सक्रीय कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बसपा और सपा की ओर से जिले की दोनों विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं।


क्या है श्योपुर जिले की जनता की आवाज ?

1- श्योपुर शहर की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए।

2- श्योपुर में कृषि महाविद्यालय की स्थापना होनी चाहिए, ताकि कृषि बाहुल्य क्षेत्र के लोग तकनीकी आधार पर कृषि कार्य कर सकें।

3- श्योपुर - शिवपुरी हाइवे को भी नेशनल हाइवे बनाया जाना चाहिए।

4- चंबल घड़ियाल अभयारण्य में चंबल सफारी शुरु होनी चाहिए, ताकि क्षेत्रीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर खुल सकें और क्षेत्र की पहचान में बढ़ोतरी हो।

5- विजयपुर, बड़ौदा और कराहल में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की जगह सिविल अस्पताल की स्थापनी की जानी चाहिए, ताकि लोगों को और बेहतर इलाज मिल सके।

6- कराहल और वीरपुर को नगर परिषद का दर्जा दिया जाना चाहिए।

7- चंबल नदी पर रामेश्वर त्रिवेणी संगम के निकट बांध बनना चाहिए, ताकि किसानों के लिए पानी आपूर्ति से लेकर बिजली उत्पादन बढ़ाया जा सके।

8- जिले के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार होने चाहिए।

9- बेरोजगारी खत्म करने के लिए जिले में औद्योगिक विकास को बढ़ावे देने की व्यवस्थाएं करनी चाहिए।

10- कुपोषण के कलंक को मिटाने के लिए कोई ठोस कार्य योजना बनाई जानी चाहिए।