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स्कूल में पानी तक नहीं, अभिजीत दीपके ने उठाई आवाज; हिंगोली से शुरू हुआ ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान

School Thik Karo Campaign: स्वतंत्रता दिवस पर CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के हिंगोली से 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू किया। उन्होंने सरकारी स्कूलों में पानी, टॉयलेट और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया।
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मुंबई

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Imran Sheikh

Aug 15, 2026

Abhijit Dipke

हिंगोली में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत करते अभिजीत दीपके। (फोटो सोर्स-@Cockroachisback)

Abhijit Dipke News: देश आजादी के 80 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है, लेकिन महाराष्ट्र के गांवों में सरकारी स्कूलों की हालत ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वतंत्रता दिवस पर CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके अपने पैतृक गांव पहुंचे और जिला परिषद स्कूल का जायजा लिया। स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी देखकर उन्होंने 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू करने का ऐलान किया।

अभिजीत दीपके ने स्कूल का निरीक्षण करने के बाद कहा कि गांव के बच्चों को आज भी पीने का पानी, टॉयलेट और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उनका कहना है कि देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बच्चे भी उतने ही जरूरी हैं, जितने शहरों में पढ़ने वाले बच्चे। उन्हें अच्छी शिक्षा के साथ पढ़ने के लिए ठीक माहौल मिलना भी जरूरी है।

स्कूल में पानी तक नहीं, टूटी खिड़कियों पर भी सवाल

दीपके ने स्कूल की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कई जरूरी सुविधाओं की कमी है। उन्होंने टूटी खिड़कियों का भी मुद्दा उठाया और सवाल किया कि अगर स्कूल की खिड़कियां तक ठीक नहीं हैं तो बच्चों से बेहतर पढ़ाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि सबसे पहले स्कूलों की बुनियादी जरूरतें पूरी होनी चाहिए। बच्चों के लिए पीने का साफ पानी, टॉयलेट, सुरक्षित स्कूल की इमारत, ठीक खिड़कियां और स्कूल तक पहुंचने का बेहतर रास्ता जैसी सुविधाएं किसी भी स्कूल के लिए जरूरी हैं।

शिकायत नहीं, सरपंच से सीधे की बात

स्कूल की समस्याओं को सामने रखने के साथ ही अभिजीत दीपके ने अपने गांव के सरपंच से भी बातचीत की। उन्होंने स्कूल की कमियों के बारे में जानकारी दी और इन्हें जल्द ठीक कराने की बात कही।

सरपंच ने भरोसा दिया कि पंचायत इन समस्याओं को दूर करने के लिए काम करेगी और करीब एक सप्ताह में जरूरी सुधार कराने की कोशिश की जाएगी। अब देखना होगा कि पंचायत का यह भरोसा जमीन पर कितनी जल्दी दिखाई देता है।

बच्चों को वीडियो बनाकर क्यों मांगनी पड़ रही सुविधाएं?

अभिजीत दीपके ने बच्चों के सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर अपनी समस्याएं बताने के तरीके पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि कहीं बच्चे स्कूल में शिक्षक भेजने की मांग कर रहे हैं तो कहीं स्कूल तक सड़क बनवाने की बात कह रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के इतने साल बाद भी बच्चों को पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं पाने के लिए सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

हिंगोली से पूरे देश तक जाएगा अभियान

दीपके ने कहा कि 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत हिंगोली से की गई है और इसे आगे देश के दूसरे ग्रामीण इलाकों तक ले जाने की कोशिश होगी। अभियान के जरिए गांवों के सरकारी स्कूलों की बुनियादी समस्याओं को सामने लाने और उनके समाधान के लिए आवाज उठाने की बात कही गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश को आगे बढ़ाना है तो गांवों के स्कूलों पर ध्यान देना होगा। बच्चों को जाति या किसी दूसरे आधार पर अलग-अलग देखने के बजाय सभी को समान अवसर और बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए।

अब इस अभियान की अगली कड़ी में दूसरे स्कूलों की स्थिति सामने लाने की बात कही जा रही है। ऐसे में हिंगोली के इस स्कूल से शुरू हुई पहल आने वाले दिनों में कितनी दूर तक पहुंचती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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