
अनिल देशमुख की जमानत पर फैसला आज
Anil Deshmukh Money Laundering Case: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता अनिल देशमुख द्वारा दायर जमानत याचिका पर फिर से सुनवाई शुरू की। दो दिन चली मैराथन सुनवाई के बाद बुधवार को सुनवाई पूरी हो गई है।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 71 वर्षीय एनसीपी नेता अनिल देशमुख की जमानत याचिका पर सभी पक्षों को सुनने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में आज फैसला सुनाये जाने की संभावना है। यह भी पढ़े-Vasai News: धमाके के बाद वसई की इंजीनियरिंग कंपनी में लगी भीषण आग, 3 लोगों की मौत, 8 की हालत गंभीर
देशमुख की ओर से पेश अधिवक्ता विक्रम चौधरी, अनिकेत निकम और इंद्रपाल सिंह ने तर्क दिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देशमुख को बिना पक्के सबूत के गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि मामले का ट्रायल अभी शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जो केस देशमुख पर दर्ज है, इस मामले में अधिकतम सात साल और न्यूनतम तीन महीने की सजा हो सकती है। जबकि देशमुख इससे भी ज्यादा का समय हिरासत में गुजार चुके हैं।
एनसीपी नेता के वकील ने कहा कि यह जांच केंद्रीय एजेंसी की राय पर आधारित है। इसे अभियोजन पक्ष द्वारा बनाया गया है।
देशमुख की जमानत याचिका को विशेष अदालत ने इस साल की शुरुआत में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत खारिज कर दिया था। तब अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया मनी लॉन्ड्रिंग में देशमुख की संलिप्तता का सबूत है। अदालत ने कहा कि सबूत यह इंगित कर रहे है कि देशमुख ने पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर "अनुचित प्रभाव" का प्रयोग किया था।
देशमुख के खिलाफ आरोप है कि, महाराष्ट्र के गृह मंत्री के रूप में उन्होंने व्यक्तिगत लाभ के लिए अपनी पद की ताकत का दुरुपयोग किया था। ईडी ने उनके खिलाफ कथित तौर पर 4.7 करोड़ रुपये के घूस का मामला बनाया था और साथ ही मुंबई के व्यापारियों से जबरन वसूली करने वाले रैकेट चलाने का भी आरोप उन पर लगाया था।
ईडी के मुताबिक हवाला के जरिए पैसा देशमुख के ट्रस्ट को भेजा गया था। इस संबंध में पहले सीबीआई ने मामला दर्ज किया था और फिर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।
गौरतलब हो कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन गृह मंत्री देशमुख ने पुलिसकर्मियों को शहर के रेस्टोरेंट और बार से हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली करने का निर्देश दिया था। हालाँकि देशमुख ने आरोपों से इनकार किया था लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई को उनके खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिए जाने के बाद उन्हें अपने पद से हटना पड़ा था। अनिल देशमुख नवंबर 2021 से मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में जेल में बंद है।
Published on:
28 Sept 2022 05:50 pm
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