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‘गलती मेरी थी’, संजय दत्त ने घर में हथियार रखने पर किया खुलासा, बोले- ‘मेरे दिमाग ने कहा, इसे एक हफ्ते के लिए रख लो’

Sanjay Dutt 1993 Arms Case: 'शेखर टुनाइट' में संजय दत्त माना कि 1993 में हथियार रखने से पहले उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज को नजरअंदाज किया था। जानिए, पिता सुनील दत्त के सामने हथकड़ी लगाए जाने और जेल में बिताए दिनों पर क्या बोले अभिनेता।
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मुंबई

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Rashi Sharma

•

Oct 10, 2026

Sanjay Dutt 1993 Arms Case

शेखर टुनाइट से संजय दत्त की फोटो। (फोटो सोर्स: YouTube/Shekhar Tonite)

Sanjay Dutt 1993 Arms Case: संजय दत्त को 1993 में AK-56 राइफल समेत गैर-कानूनी हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और बाद में आर्म्स एक्ट के तहत उन्हें पांच साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। 'शेखर टुनाइट' पर शेखर सुमन से बात करते हुए, एक्टर ने माना कि हथियार रखने के लिए राजी होने से पहले उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज को नजरअंदाज किया था, उन्होंने कहा कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि इसके नतीजे कितने गंभीर होंगे।

मेरे दिमाग ने कहा, 'इसे एक हफ्ते के लिए रख लो

बातचीत में संजय ने कहा कि उन्हें खुद को यह समझाने के बजाय कि एक हफ्ते तक हथियार रखने से कोई नुकसान नहीं होगा, अपने दिल की बात सुननी चाहिए थी।

संजय ने कहा, "गलतियां मेरी थीं। अगर आपका दिल आपसे कुछ कहे, तो आपको उसकी बात सुननी चाहिए। अगर आपका दिमाग आपसे कुछ कहे, तो उसे इतनी जल्दी न मानें। जब वह घटना हुई और मैंने देखा कि उसमें क्या शामिल है, तो मेरे दिल ने मुझसे कहा कि ऐसा न करूं। लेकिन मेरे दिमाग ने कहा, 'इसे एक हफ्ते के लिए रख लो। इसमें क्या नुकसान है?'"

देश के हर नागरिक को वहां के कानूनों के बारे में पता होना चाहिए

एक्टर ने माना कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनके फैसले के नतीजे कितने गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने उस देश के कानूनों को जानने के महत्व पर भी जोर दिया जहां कोई रहता है। उन्होंने कहा, "मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि नतीजे क्या हो सकते हैं। मैं अक्सर कहता हूं कि किसी भी देश में रहने वाले हर व्यक्ति को वहां के कानूनों के बारे में पता होना चाहिए।"

मुझे अपने पिता के लिए मजबूत रहना पड़ा

उसी बातचीत के दौरान, संजय दत्त ने याद किया जब उन्हें पहली बार अपने पिता, दिग्गज एक्टर सुनील दत्त के सामने हथकड़ी लगाई गई थी। उन्होंने कहा, “जब पुलिस आई और मुझे हथकड़ी पहनाई, तो मेरे पिता सदमे में आ गए। उनकी आंखों में आंसू थे और उन्होंने कहा, ‘तुम मेरे बेटे के साथ क्या कर रहे हो?’ मैंने उन्हें कसकर गले लगाया और कहा, ‘आप इन हथकड़ियों से परेशान क्यों हो रहे हैं? ऐसा मत कीजिए। यह बस एक प्रक्रिया है, प्लीज परेशान न हों।’ असल में, यह मुझे अंदर ही अंदर तोड़ रहा था। लेकिन मुझे उनके लिए मजबूत बने रहना था।” संजय ने बताया कि भले ही वह भावनात्मक रूप से संघर्ष कर रहे थे, लेकिन उन्होंने अपने पिता को यह नहीं दिखाया कि यह स्थिति उन पर कितना गहरा असर डाल रही थी, बल्कि उन्हें दिलासा देने की कोशिश की। उन्होंने आगे कहा, “इसी तरह मैं इस पूरे मुकदमे के दौरान आगे बढ़ा जो 24 साल तक चला।”

जेल में सिगरेट तो नहीं, पर बीड़ी मिल सकती है

संजय ने जेल में अपने अनुभव के बारे में भी बात की और बताया कि कैसे अधिकारियों को उम्मीद थी कि सेलिब्रिटी वाली सुख-सुविधायें न मिलने से उन पर बुरा असर पड़ेगा। “लेकिन मुझ पर कोई असर नहीं हुआ। क्योंकि मैं टूटा नहीं। वे हैरान रह गए। उन्होंने मेरा मजाक उड़ाया। उनमें से एक मेरे पास आया और बोला, ‘तुम्हें यहां कोई सिगरेट नहीं मिलेगी। अब तुम क्या करोगे?’ तो मेरा जवाब था, ‘सर, कम से कम मुझे यहां बीड़ी तो मिल सकती है।’” संजय ने कहा कि हालात में आए बदलावों का उन पर वैसा असर नहीं हुआ जैसा लोगों को उम्मीद थी।

संजय दत्त के खिलाफ मामला

जानकारी के लिए बता दें कि संजय की ये बातें उस कानूनी मामले से जुड़ी हैं जो 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सीरियल बम धमाकों के बाद शुरू हुआ था। जांच के दौरान, एक्टर का संबंध गैर-कानूनी तरीके से हथियार रखने से जुड़ा, जिसमें AK-56 राइफल, एक पिस्तौल और गोला-बारूद शामिल थे। उन्हें अप्रैल 1993 में गिरफ्तार किया गया था।

2013 में सुप्रीम कोर्ट ने आर्म्स एक्ट के तहत संजय को 5 साल कैद की सजा सुनाई

नवंबर 2006 में, एक विशेष अदालत ने संजय को प्रतिबंधित हथियार गैर-कानूनी तरीके से रखने के लिए आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया। उन्हें टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट, या TADA के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया गया और बम धमाकों में शामिल होने का दोषी नहीं पाया गया। मार्च 2013 में, सुप्रीम कोर्ट ने आर्म्स एक्ट के तहत उनकी सजा को बरकरार रखा, लेकिन उनकी जेल की सजा को छह साल से घटाकर पांच साल कर दिया। संजय दत्त ने अपनी बाकी सजा काटने के लिए सरेंडर किया और अच्छे व्यवहार के कारण सजा में छूट मिलने के बाद फरवरी 2016 में पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल से रिहा हो गए।

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