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Maharashtra SIR: 38 मुस्लिम बहुल सीटों पर 30% मतदाता ‘बाहर’, सामने आई बड़ी वजह 

Maharashtra Draft Voter List 2026: महाराष्ट्र SIR के ड्राफ्ट मतदाता सूची आंकड़ों के अनुसार, अधिक मुस्लिम आबादी वाले 38 विधानसभा क्षेत्रों में करीब 30 प्रतिशत मतदाता 'अन-कलेक्टेबल' श्रेणी में हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

Sep 09, 2026

Maharashtra SIR Muslim Seats Voter Deletion

महाराष्ट्र की 38 मुस्लिम बहुल सीटों पर 10 में से 3 मतदाता SIR में बाहर (Photo: IANS)

Maharashtra SIR Draft Voter List: महाराष्ट्र में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के विश्लेषण से एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की उन 38 विधानसभा सीटों पर, जहां मुस्लिम आबादी 20 प्रतिशत से अधिक है, लगभग 30 प्रतिशत मतदाताओं को नए ड्राफ्ट रोल में आगे नहीं बढ़ाया गया है। इन मतदाताओं को आधिकारिक डेटा में 'अन-कलेक्टेबल' श्रेणी में डाला गया है। पूरे महाराष्ट्र के औसत आंकड़ों की बात करें तो राज्य स्तर पर 21.14 प्रतिशत नाम अन-कलेक्टेबल श्रेणी में रखे गए हैं। इस तुलना में मुस्लिम बहुल सीटों पर यह संख्या काफी अधिक दिखाई दे रही है।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि महाराष्ट्र की 288 में से 38 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 37.51 लाख (29.77%) मतदाताओं के नाम पिछली सूची से आगे नहीं बढ़ाए गए, जहां मुस्लिम आबादी 20 प्रतिशत से अधिक है। पूरे महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 21.14 प्रतिशत है। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इतने मुस्लिम मतदाताओं को ही मतदाता सूची से बाहर किया गया है।

भिवंडी पूर्व में सबसे ज्यादा 49% मतदाता 'बाहर'

आंकड़ों के अनुसार, मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के घने इलाकों में मतदाताओं के नाम आगे न बढ़ाए जाने की दर सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। भिवंडी पूर्व में 49.10 प्रतिशत मतदाताओं का नाम हाल ही में जारी ड्राफ्ट रोल में नहीं है। इसके बाद भिवंडी पश्चिम में 44.72 प्रतिशत, मुंब्रा-कलवा में 42.91 प्रतिशत और मानखुर्द शिवाजीनगर में 42.31 प्रतिशत मतदाता 'अन-कलेक्टेबल' श्रेणी में हैं।

इसके अलावा मुंबई के चांदिवली विधानसभा क्षेत्र में जहां मुस्लिम आबादी 27.6 प्रतिशत है, वहां 'अन-कलेक्टेबल' मतदाताओं का अनुपात 41.44 प्रतिशत रहा। वहीं सायन-कोलीवाड़ा और पुणे कैंटोनमेंट में भी 40 प्रतिशत से ज्यादा मतदाता बाहर हो गए हैं।

इन आंकड़ों का मतलब मुस्लिम मतदाताओं का नाम हटना नहीं!

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि SIR के आंकड़ों में मतदाताओं का धर्म दर्ज नहीं किया गया है। इसलिए इन आंकड़ों से यह पता नहीं चलता कि कितने मुस्लिम मतदाताओं के नाम नए ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं किए गए।

यह विश्लेषण केवल उन 38 विधानसभा क्षेत्रों के आधार पर किया गया है, जहां मुस्लिम आबादी 20 प्रतिशत से अधिक है। इसलिए किसी विधानसभा क्षेत्र में 'अन-कलेक्टेबल' मतदाताओं का प्रतिशत सीधे तौर पर मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाए जाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि किसी सीट पर मुस्लिम आबादी का प्रतिशत अधिक होने से मतदाता बाहर होने की दर सीधे नहीं बढ़ती है। मालेगांव मध्य में मुस्लिम आबादी 78.4 प्रतिशत है, जो इन 38 सीटों में सबसे ज्यादा है। लेकिन यहां 'अन-कलेक्टेबल' मतदाताओं का अनुपात सिर्फ 23.46 प्रतिशत रहा।

इसके विपरीत, मुंबई के मानखुर्द शिवाजीनगर में मुस्लिम आबादी 53 प्रतिशत है और 'अन-कलेक्टेबल' का आंकड़ा 42 प्रतिशत के पार है। वहीं भिवंडी पूर्व में मुस्लिम आबादी करीब 51 प्रतिशत होने के बावजूद यह आंकड़ा सबसे ज्यादा 49.10 प्रतिशत है।

इन सीटों पर 10 प्रतिशत से भी कम मतदाता ‘बाहर’

वहीं कुछ विधानसभा क्षेत्रों में 'अन-कलेक्टेबल' मतदाताओं का अनुपात काफी कम रहा। मलकापुर में मुस्लिम आबादी 20.4 प्रतिशत है और यहां सिर्फ 7.68 प्रतिशत मतदाता इस श्रेणी में हैं। इसी तरह जलगांव के रावेर (मुस्लिम आबादी 20.6%) में 9.91 प्रतिशत, लातूर शहर (मुस्लिम आबादी 20.4%) में 11.91 प्रतिशत और बालापुर (मुस्लिम आबादी 23.8%) में 11.71 प्रतिशत मतदाता ही 'अन-कलेक्टेबल' श्रेणी में दर्ज किए गए।

क्यों 'अन-कलेक्टेबल' हुए 10 में से 3 मतदाता?

मुस्लिम बहुल 38 सीटों पर 37.51 लाख मतदाताओं को अन-कलेक्टेबल श्रेणी में अलग-अलग कारणों की वजह से रखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, इनमें 42.05 प्रतिशत मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है। वहीं 35.59 प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं जिन्हें ट्रेस नहीं किया जा सका या जो अनुपस्थित पाए गए। इसके अलावा 12.76 प्रतिशत मृत मतदाता और 8.33 प्रतिशत डुप्लीकेट पंजीकरण के मामले दर्ज किए गए।

राज्य की 53 अन्य सीटों पर भी ऊंची दर दर्ज

महाराष्ट्र की 53 अन्य विधानसभा सीटों पर भी बड़ी संख्या में मतदाता ड्राफ्ट रोल से बाहर हुए है। इनमें कोलाबा (46.92%), खड़कवासला (46.53%), नालासोपारा (46.35%), कोथरुड (46.17%) और कल्याण ग्रामीण (46.05%) जैसी प्रमुख सीटें शामिल हैं।