24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मुंबई के 17 वर्षीय छात्र ने बनाया ‘FasalForward’, किसानों को फसल का सही दाम दिलाने में करेगा मदद

FasalForward App: मुंबई के 17 वर्षीय छात्र अंश जालान ने FasalForward प्लेटफॉर्म बनाया है, जो किसानों को मंडियों के भाव की तुलना करने, अगले 30 दिनों में फसल की कीमतों का अनुमान लगाने और सही समय पर उपज बेचने का फैसला लेने में मदद करता है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

मुंबई

•

image

Imran Ansari

•

Updated: 24 Oct 2026, 2:44 PM IST

FasalForward App

मुंबई के 17 वर्षीय छात्र ने बनाया ‘FasalForward’, फोटो- AI

FasalForward: किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए मुंबई के 17 वर्षीय छात्र अंश जालान ने ‘FasalForward’ नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया है। दक्षिण मुंबई के एक स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले अंश का यह प्लेटफॉर्म किसानों को अलग-अलग राज्यों की मंडियों में फसलों के भाव की तुलना करने, अगले 30 दिनों के संभावित दाम का अनुमान लगाने और फसल बेचने या कुछ समय तक रोककर रखने का फैसला लेने में मदद करता है।

अंश ने महसूस किया कि कई किसान मंडियों के वास्तविक भाव की जानकारी के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहते हैं, जबकि सरकारी वेबसाइटों पर कीमतों से जुड़ा डेटा उपलब्ध होता है। इसी जानकारी को एक जगह पर व्यवस्थित और आसानी से समझने योग्य बनाने के उद्देश्य से उन्होंने FasalForward तैयार किया।

गलत समय पर फसल बेचने से किसानों को होता है नुकसान

अंश के मुताबिक, महाराष्ट्र के जलगांव में उनकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जिसे चने की फसल गलत समय पर बेचने के कारण हजारों रुपये का नुकसान हुआ था। उनका मानना है कि अगर किसान को बाजार के संभावित रुझान की जानकारी समय पर मिल जाए, तो वह बेहतर निर्णय ले सकता है। हालांकि, केवल मंडियों के भाव की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। फसल खराब होने, भंडारण की सुविधा और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इसी जरूरत को देखते हुए प्लेटफॉर्म किसानों को फसल बेचने के सही समय के बारे में अनुमान उपलब्ध कराता है।

सरकारी पोर्टल से जुटाता है मंडियों के भाव

FasalForward सरकारी पोर्टल से कृषि उपज मंडी समिति (APMC) के भाव जुटाता है। इसके बाद जटिल आंकड़ों को सरल प्रारूप में प्रस्तुत करता है, ताकि किसान आसानी से कीमतों की तुलना कर सकें। इसमें भविष्य के भाव का अनुमान लगाने के लिए प्रेडिक्टिव मॉडल और डिसीजन ट्री जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। अंश का दावा है कि प्लेटफॉर्म का प्रेडिक्टिव मॉडल करीब 70 प्रतिशत सटीकता के साथ अनुमान लगाता है। हालांकि, यह आंकड़ा छात्र की ओर से बताया गया है और वास्तविक बाजार में अनुमान की सटीकता परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है।

पांच राज्यों की 18 फसलों पर मिलती है जानकारी

प्लेटफॉर्म की शुरुआत महाराष्ट्र के जलगांव से हुई, जो केले की खेती के लिए जाना जाता है। फिलहाल यह महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 18 अलग-अलग फसलों के भाव का अनुमान उपलब्ध कराता है। इसे वेबसाइट के साथ ऐप के रूप में भी पेश किया गया है। किसानों की सुविधा के लिए यह अंग्रेजी, हिंदी और मराठी भाषाओं में उपलब्ध है।

अंश के मुताबिक, प्लेटफॉर्म को अब तक करीब 50 उपयोगकर्ता मिल चुके हैं। इस विचार को विकसित करने से पहले उन्होंने महाराष्ट्र में किसानों से बातचीत की, पुणे के आसपास खेतों का दौरा किया और कृषि से जुड़े मौजूदा ऐप के डेवलपर्स से भी चर्चा की। अंश का उद्देश्य अपनी कोडिंग की जानकारी का इस्तेमाल किसानों की समस्याओं को हल करने में करना है। उनका मानना है कि बाजार की जानकारी और कीमतों के संभावित रुझान को समझकर किसान बेहतर फैसले ले सकते हैं और अपनी उपज का उचित मूल्य पाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

बड़ी खबरें

View All

मुंबई

महाराष्ट्र न्यूज़

ट्रेंडिंग