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संसद और विधानसभा में शिवसेना के ऑफिस पर शिंदे गुट का कब्जा, अब BMC की बारी!

Shiv Sena Office: एकनाथ शिंदे गुट का अगला मकसद बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) मुख्यालय में शिवसेना कार्यालय पर नियंत्रण पाना है। हालांकि यह आसान नहीं लग रहा है।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

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Updated: 21 Feb 2023, 6:05 PM IST

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एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे

Uddhav Thackeray Vs Eknath Shinde: निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को शुक्रवार को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी। इसके साथ ही दिवंगत बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना का धनुष-बाण चुनाव चिह्न भी शिंदे खेमे को मिल गया। जिसके बाद शिंदे समूह ने संसद और महाराष्ट्र विधानमंडल परिसर में स्थित शिवसेना के ऑफिसों पर बतौर ‘शिवसेना पार्टी’ हक जमा लिया। इस बीच, आज मुख्यमंत्री शिंदे ने शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है।

जानकारी के मुताबिक, शिंदे गुट का अगला मकसद बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) मुख्यालय में शिवसेना कार्यालय पर नियंत्रण पाना है। हालांकि यह आसान नहीं लग रहा है। खबर है कि महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले समूह के एक दर्जन से अधिक पूर्व पार्षदों ने बीएमसी मुख्यालय बिल्डिंग में स्थित शिवसेना कार्यालय के बाहर डेरा डाल दिया है। यह भी पढ़े-‘सीएम शिंदे के बेटे ने दी मेरी सुपारी...', संजय राउत ने फडणवीस और पुलिस कमिश्नर को लिखा पत्र


पुलिस सुरक्षा बढ़ाई गई

अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि पूर्व पार्षदों के बीएमसी मुख्यालय के भूतल पर स्थित कार्यालय के बाहर डेरा डालने के मद्देनजर पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी गई। जिससे यहां कानून-व्यवस्था की स्थिती बनी रहे। दरअसल, शिवसेना के दोनों गुटों के बीच यहां बीते दिसंबर महीने में नोकझोंक हुआ था, जिसके बाद बीएमसी प्रशासन ने निकाय मुख्यालय में सभी राजनीतिक दलों के कार्यालयों को सील कर दिया था। ये कार्यालय अब भी सील हैं। दरअसल बीएमसी के सभी पार्षदों का कार्यकाल मार्च 2022 में ही समाप्त हो चुका है और देश की सबसे अमीर महानगरपालिका का कामकाज देखने के लिए प्रशासन नियुक्त किया गया है।


हमें कोई लालच नहीं- CM शिंदे


उल्लेखनीय है कि एकनाथ शिंदे ने सोमवार को साफ कहा कि असली शिवसेना के रूप में उनके गुट को मान्यता देने के चुनाव आयोग के फैसले के बाद पार्टी की किसी भी संपत्ति पर कोई दावा नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा के वारिस हैं और हमें किसी प्रकार का लालच नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आयोग ने शिवसेना के नाम और चिन्ह पर नियमानुसार निर्णय लिया और विधिमंडल (विधानमंडल परिसर) में स्थित कार्यालय शिवसेना का है। जहां तक संपत्ति का सवाल है, हमें कोई लालच नहीं है। संपत्ति और धन के लालची लोगों ने 2019 में गलत कदम उठाया था।’’

बता दें कि उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और कांग्रेस के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई थी, जो पिछले साल जून में शिंदे की अगुवाई में बगावत के बाद गिर गई।

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