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दिनेश कुमार स्वामी @ नागौर। पिछले दो-तीन दशकों में देश में ग्रामीण से शहरी आबादी की ओर बड़ा बदलाव हुआ है। शहरों के विस्तार और ग्रामीण बस्तियों के शहरी स्वरूप में आने के साथ पंचायत आधारित ग्रामीण शासन की सीमा भी कई जगह बदली है। हर परिसीमन और प्रशासनिक पुनर्गठन के साथ शहरों की सीमा के आसपास के गांवों के नगर निकायों में शामिल होने की प्रक्रिया दिखाई देती है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच ग्राम स्वराज की भौगोलिक और प्रशासनिक जमीन बचाना भी एक चुनौती से कम नहीं है।
शहर की सीमा बढ़ने पर किसी गांव की प्रशासनिक व्यवस्था भी बदल जाती है। ग्राम पंचायत की जगह नगर पालिका, नगर परिषद या नगर निगम की व्यवस्था लागू हो जाती है। यानी गांव का स्थानीय शासन ढांचा बदल जाता है और पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधि की जगह शहरी निकाय की व्यवस्था प्रभावी हो जाती है।
शहरीकरण की रफ्तार डेढ़ दशक में ज्यादा तेज हो गई। शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है जबकि ग्रामीण आबादी की बढ़ने की रफ्तार कम है। वर्ष 2011 और 2021 की जनगणना की बनी सूची में 1851 गांव कम हुए हैं। इसी तरह लगातार आबादी के अनुसार नई ग्राम पंचायतों के गठन या पुनर्गठन के बावजूद देश में करीब 14 हजार ग्राम पंचायत कम हो गई है। जबकि नगरीय निकायों की तादाद इसी अनुपात में बढ़ गई है।
(स्रोत:एलजीडी - लोकल गर्वमेंट डायरेक्ट्री)
देश में गांवों की प्रशासनिक सीमाएं बदल रही है। आबादी बढ़ने और नए राजस्व गांव बनने से गांवों की संख्या सरकारी आंकड़ों में बढ़ी हैं। मसलन, 2001 में देश में 6,38,588 गांव थे। जबकि 2011 में 6,40,932 हो गए। इसके बाद 2021 की जगनगणना के लिए बनी गांवों की सूची में यह 6 लाख 39 हजार दर्ज हैं। यानि 1800 से ज्यादा गांव अब रिकॉर्ड पर नहीं रहे।
वर्ष ग्राम पंचायतें
2011 2.30,000
2021 2,69,351
2026 2,55,122
( यानि देश में पांच साल के दौरान 14 हजार 229 ग्राम पंचायत घटी है। कुछ नगर पालिकाएं बन गई। कुछ का शहरों में विलय होने से समाप्त कर दी गई )
देश में 2021 में 4,372 शहरी निकाय अथवा शहर दर्ज थे। वर्ष 2025 में पीएमएवाई-यू के तहत शहरों की संख्या 4,618 बताई गई। यानी इस योजना को शहरों की संख्या का आधार माने तो 246 शहर बढ़े है।
ग्रामीण अंचल में पंचायतीराज में आज भी सबसे बड़ी कमी नजर आती है कि इसका प्रशासनिक ढांचा वैसा आकार नहीं ले पाया है जैसा शहरी निकायों में है। राजस्थान में ही नवगठित या नवसृजित ग्राम पंचायतों के लिए अभी तक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर भवन नहीं बने है। कुछ सालों पुरानी पंचायत समितियों के भी पर्याप्त भवन नहीं है। ग्राम विकास अधिकारी, सरपंच और वार्ड पंच जैसा पूरा ढांचा ग्राम पंचायत में है। परन्तु नियमित रूप से पंचायत भवन में उपिस्थति आज भी नहीं मिलती। ग्राम पंचायतों के रिकॉर्ड भी व्यविस्थत नहीं होने से भी ग्रामीण परेशान रहते है।
ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर भी अभी तक नियमित सफाई की कोई वयवस्था नहीं है। इसके लिए पहले गांवों में सड़कों और नालियों का निर्माण तथा पानी निकासी की व्यवस्था के साथ गंदे पानी के निस्तारण की व्यवस्था करनी होगी। बरसात में तो गांवों की गलियों से निकलना मुश्किल हो जाता है। गांवों को जोड़ने वाले रास्तों पर कीचड़ की परेशानी आम है। इसके साथ ही गांवों को आपस में जोड़ने वाली सड़कों की हालत खराब है। गांवों के अंदर तो गिनी-चुनी पक्की सड़कें ही मिलेगी।
प्रदेश में 14,403 ग्राम पंचायतों के सरपंच का निर्वाचन जल्द ही होना है। इसी के साथ 1,30,584 वार्ड पंच निर्वाचित होंगे। यह बताता है कि चुनौतियों के बावजूद प्रदेश में पंचायतराज की भूमिका आज भी सबसे बड़ी है। गांव के सरपंच से राजनीति की शुरुआत करने वाले मुख्यमंत्री, सांसद और विधायक तक बने है।
Updated on:
02 Oct 2026 06:04 pm
Published on:
02 Oct 2026 06:04 pm
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