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नए सभापति के निरीक्षण जारी, शहर की बदहाली कब बदलेगी, अभी हालत खराब

नागौर. नगरपरिषद में नया सभापति आने से शहरवासियों को व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद है। सभापति शहर के अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देख रहे हैं, लेकिन बदहाल सड़कों, अटके पट्टों, लंबित निर्माण स्वीकृतियों और मूलभूत सुविधाओं की समस्याएं अब भी सामने हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार पिछले करीब 6 माह से ठेकेदारों के भुगतान को छोड़कर अधिकांश काम प्रभावित रहे हैं। बुधवार को समस्याएं लेकर नगरपरिषद पहुंचे लोग जिम्मेदार अधिकारियों के नहीं मिलने से परेशान नजर आए। अब शहरवासियों की नजर निरीक्षण के बाद कार्रवाई शुरू होने पर है।
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Nagaur: Dilapidated road in Loharpura; awaiting repairs for a long time

Nagaur: Dilapidated road in Loharpura; awaiting repairs for a long time

नागौर. नगरपरिषद में नया सभापति आने के बाद शहर को लेकर उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन नई कुर्सी के सामने पुरानी समस्याओं का ढेर लगा हुआ है। सभापति कुर्सी संभालने के बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को देख रहे हैं। अब शहरवासियों की नजर इस बात पर है कि निरीक्षण के बाद बदहाल सडक़ों, अटके पट्टों, लंबित निर्माण स्वीकृतियों और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं पर काम कब शुरू होता है। नगरपरिषद के विभागीय सूत्रों के अनुसार पिछले करीब 6 माह से ठेकेदारों के भुगतान को छोडक़र अधिकांश काम प्रभावित रहे हैं। इसका असर अब सीधे शहरवासियों के कामकाज पर दिखाई दे रहा है। शहर की सडक़ों की हालत सही है, नहीं, इसके साथ ही अन्य समस्याओं को लेकर पहुंचे लोग बुधवार को नगरपरिषद में परेशान हालत में भटकते नजर आए। शहरवासियों का कहना है कि जब काम करवाने के लिए नगरपरिषद आएं और जिम्मेदार अधिकारी ही नहीं मिलें तो शिकायत आखिर किसके सामने रखें।

पट्टों की फाइलें महीनों से अटकी
विभागीय सूत्रों के अनुसार नगरपरिषद में करीब 1100 फाइलें पट्टों के निस्तारण का इंतजार कर रही हैं। इनमें रेरा में पंजीकृत 30 कॉलोनियों से जुड़े प्रकरण भी शामिल हैं। इन कॉलोनियों में करीब 3000 से 3500 पट्टे होने हैं। इसी तरह से पट्टों के अलावा भवन निर्माण स्वीकृति के 100 से अधिक और नामांतरण के भी 100 से अधिक प्रकरण लंबित बताए जा रहे हैं। पानी, बिजली और फायर एनओसी से जुड़े प्रकरण भी इसमें जोड़ दिए जाएं तो लंबित कामों का दायरा और बढ़ जाता है। लोगों को छोटे से काम के लिए कई बार नगरपरिषद के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

स्थायी आयुक्त नहीं, जनता किसके पास जाए
नगरपरिषद में स्थायी आयुक्त की नियुक्ति नहीं होना भी कामकाज की बड़ी समस्या बनी हुई है। वर्तमान में आयुक्त का प्रभार एसडीएम के पास है। एसडीएम के पास पूरे उपखंड की जिम्मेदारी होने के कारण उनका नगरपरिषद में नियमित बैठना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में अपनी समस्या लेकर आने वाले लोगों को कई बार जिम्मेदार अधिकारी का इंतजार करना पड़ता है। नगरपरिषद के सामने केवल लंबित फाइलों का निस्तारण की समस्या नहीं है, बल्कि शहर की सडक़ों की हालत सुधारना, पार्किंग व्यवस्था विकसित करना, अव्यवस्थित निर्माण पर कार्रवाई करना और सेटबैक की जगह निर्माण करने वालों का प्रावधानों के खिलाफ अंगूठा दिखाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करना है, लेकिन अब इसे करे कौन। इसको लेकर भी स्थिति विकट होने लगी है।
लोगों ने कहा, समस्या बताएं तो किसे
बुधवार को नगरपरिषद में मिले इरशाद, इलियास, शब्बीर और इमरोज ने बताया कि वे लोहारपुरा की सडक़ की समस्या को लेकर नगरपरिषद आए थे। उनका कहना था कि सडक़ लंबे समय से खराब है और लोगों को रोज परेशानी उठानी पड़ रही है। नगरपरिषद में जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिलने के कारण समस्या बताने के लिए भी भटकना पड़ रहा है। लोगों ने कहा कि नया सभापति शहर का निरीक्षण कर रहा है, अब निरीक्षण के बाद मौके पर काम भी दिखाई देना चाहिए।

क्या कहते हंै जिम्मेदार……
नगरपरिषद आयुक्त का प्रभार संभाल रहे गोविंद सिंह भिन्चर ने बताया कि लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए प्रक्रिया को गति दी जा रही है। पट्टे, भवन निर्माण स्वीकृति और नामांतरण सहित अन्य प्रकरणों की समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाएगा। शहर में सडक़, सफाई, पार्किंग और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का भी निरीक्षण कराया जा रहा है। सामने आ रही समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं।