नागौर. प्रदेश के सार्वजनिक निर्माण विभाग मंत्री सामाजिक एवं राजनीतिक मंचों पर भले ही साम्प्रदायिक सद्भाव की बात करते हैं, लेकिन उन्हें भारतीय संस्कृति के परिचायक 'तिलकÓ से विशेष परहेज है। मंत्री खान उस पार्टी से भी सम्बन्ध रखते हैं, जो हमेशा तिलक और त्रिशूल की बात करती है। पहल तो मंत्री अपने ललाट पर तिलक लगवाते नहीं और यदि मजबूरीवश कहीं लगवाना पड़ा तो वे हाथों-हाथ उसे साफ कर लेते हैं।
जी हां, एेसा एक बार नहीं, कई बार हुआ है। ताजा प्रकरण रविवार को ही छोटी खाटू में आयोजित हिन्दी पुस्तकालय के साहित्य सम्मान समारोह में देखने को मिला, जबकि श्री छोटी खाटू हिन्दी पुस्तकालय संस्थान के पदाधिकारियों ने बड़े लाड-कोड से उनका तिलक लगाकर एवं मोतियों की माला पहनाकर स्वागत किया। मंत्री ने सीट पर बैठते ही संस्थान की ओर से दिए लगाए गए कपड़े के बैच से ही अपना तिलक साफ कर लिया। पहले तो उन्होंने ललाट रगड़-रगड़ कर साफ किया, फिर जब उन्हें विश्वास नहीं हुआ तो उन्होंने अपने मोबाइल का फ्रंट कैमरा चालू कर देखा कि कहीं तिलक के अंश ललाट पर रह तो नहीं गए। मंत्री द्वारा एेसा करने के दौरान सामने बैठे सैकड़ों प्रबुद्ध नागरिकों ने उन्हें देखा तो कहने लगे कि देखो, साम्प्रदायिक सद्भाव की बात करने वाले राजनेता कुछ समय के लिए भी अपने भाल पर तिलक नहीं रख सके।