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CJP Protest: विमान में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे, यात्री का सवाल, ‘आखिर जनता को क्यों भुगतनी पड़े परेशानी?’

Mumbai to Delhi Flight,: विमान के भीतर सुनाई दिए ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों ने सफर कर रहे लोगों की बेचैनी बढ़ा दी। एक सहयात्री ने प्रदर्शनकारियों के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारों की लड़ाई में आम नागरिकों की सुविधा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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भारत

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Manoj Vashisth

•

Oct 10, 2026

Abhijeet Dipke, Cockroach Janta Party

Cockroach Janta Party: अभिजीत दिपके के विरोध प्रदर्शन पर यात्री की नाराजगी, बोले- आम जनता क्यों हो परेशान? (फोटो सोर्स: ANI)

Inquilab Zindabad Slogans: दिल्ली जा रही एक उड़ान में विरोध प्रदर्शन ने उस समय नया विवाद खड़ा कर दिया, जब विमान के उतरने के बाद भी यात्रियों को इंतजार करना पड़ा। विमान में मौजूद एक यात्री ने Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके से जुड़े प्रदर्शन पर नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि आखिर कुछ लोगों के विरोध की कीमत आम जनता क्यों चुकाए? यात्री ने लोकतांत्रिक व्यवस्था, न्यायपालिका और विरोध के तरीकों को लेकर भी अपनी बात रखी।

मुंबई से दिल्ली जा रही उड़ान में हुई घटना

मुंबई से दिल्ली की यात्रा कर रहे एक विमान में उस समय असहज स्थिति बन गई, जब लैंडिंग के बाद भी यात्रियों को विमान से निकलने के लिए इंतजार करना पड़ा। विमान में सवार एक यात्री के मुताबिक, उतरने के बाद उन्हें विमान के अगले हिस्से से ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे सुनाई दिए। यह घटनाक्रम Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की यात्रा के दौरान सामने आया।

प्रदर्शन करना है तो जनता को परेशान क्यों करें?

समाचार एजेंसी ANI के माध्यम से सामने आए यात्री के बयान में प्रदर्शन के तरीके को लेकर तीखी नाराजगी दिखाई दी। यात्री ने कहा कि उन्हें अभिजीत दीपके के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन इस तरह के व्यवहार से आम लोगों को परेशानी होती है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाया गया है, तो उसके समाधान के लिए संबंधित संस्थाएं मौजूद हैं। ऐसे मामलों में न्यायपालिका की भूमिका अहम है और सुप्रीम कोर्ट इस तरह के विवादों पर विचार कर सकता है।

यात्री ने यह भी कहा कि यदि हर व्यक्ति हर समस्या का समाधान खुद सड़क या सार्वजनिक स्थान पर विरोध करके करने लगे, तो संस्थागत व्यवस्था का क्या अर्थ रह जाएगा? उनके मुताबिक, विरोध का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन इसके कारण दूसरे लोगों के जरूरी काम और यात्रा प्रभावित नहीं होने चाहिए।

36 दिन के प्रदर्शन का भी किया जिक्र

यात्री ने अपने बयान में दावा किया कि प्रदर्शनकारी पहले भी 36 दिनों तक आंदोलन कर चुके थे। उन्होंने सवाल किया कि क्या विरोध के नाम पर हर जगह आम नागरिकों को असुविधा में डालना उचित है? उनके अनुसार, लोकतंत्र में असहमति जताने के कई तरीके हो सकते हैं, लेकिन किसी भी आंदोलन की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह आम लोगों के अधिकारों का कितना सम्मान करता है।

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