28 सितंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पहले बनाया एआइ का रास्ता, अब कह रहे हैं बचो

AI Jobs: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से युवाओं की जिंदगी का हिस्सा बन रहा है, लेकिन इसके बढ़ते प्रभाव और संभावित खतरों ने चिंता भी बढ़ा दी है। विशेषज्ञों से लेकर एआइ विकसित करने वाले लोगों तक, कई आवाजें इसके इस्तेमाल, नौकरियों और मानव भविष्य पर सवाल उठा रही हैं।
4 min read
Google source verification

भारत

•

image

Pratiksha Gupta

•

Sep 28, 2026

Artificial Intelligence

युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहा AI का इस्तेमाल

AI Risks: दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का जीवन आसान बनाने के भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरा है। इस बीच एक नई रिपोर्ट में दिलचस्प बात सामने आई है कि लगभग आधे युवा तथ्यों की जांच के लिए अब किसी इंसान की तुलना में एआइ पर अधिक विश्वास कर रहे हैं। इस बढ़ती चिंता को देखते हुए रिपोर्ट के लेखकों ने सरकार से शिक्षा में एआइ के उपयोग के लिए 10 सूत्रीय योजना अपनाने का आह्वान किया है, जिसमें शिक्षा विभाग के भीतर एआइ पर एक त्वरित प्रतिक्रिया इकाई की स्थापना के साथ-साथ 100 एआइ चैंपियन स्कूलों और कॉलेजों का एक नेटवर्क बनाना शामिल है।

एआइ नहीं, तो स्कूल जाना समय की बर्बादी

इंग्लैंड स्थित पब्लिक पॉलिसी रिसर्च एजेंसी द्वारा किया गया यह सर्वे 11 से 24 वर्ष की आयु के 4,000 से अधिक लोगों पर किया गया था। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर आज के स्कूल और कॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) को अपनी पढ़ाई में शामिल नहीं करते हैं या इसे नजरअंदाज करते हैं, तो छात्रों को लगेगा कि स्कूल जाना समय की बर्बादी है। और एआइ के प्रति विश्वास और भी मजबूत हो सकता है।

शिक्षा संस्थान तालमेल बिठाने में नाकाम

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंग्लैंड की शिक्षा प्रणाली एक ऐसे एआइ-विहीन दुनिया के लिए पढ़ाने की कोशिश कर रही है, जो अब अस्तित्व में नहीं है। जबकि अधिकांश युवा लगभग 87% एआइ टूल का उपयोग करने का अनुभव रखते हैं। शिक्षा संस्थान इस बात से तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं कि युवा एआइ का उपयोग किस तरह और कितनी मात्रा में कर रहे हैं। यह अंतर संस्था के कथित मूल्य में कमी के रूप में सामने आने लगा है।

एआइ पर अधिक भरोसा क्यों?

  • तुरंत जवाब मिलना
  • बिना किसी पक्षपात की उम्मीद
  • झिझक न होना

साथ जुड़े बड़े जोखिम

  • गलत तथ्यों को आत्मविश्वास से पेश करना
  • पुराना डेटा मिलना
  • डेटा पहले से निर्धारित होने से पूर्वाग्रह का खतरा

सितंबर में अचानक जागे सभी

  • सितंबर में एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई ने एआइ के विकास की रफ्तार धीमी करने की बात कही। दो अन्य प्रमुख एआइ कंपनियों के मालिक एलन मस्क और सैम ऑल्टमैन ने इसका समर्थन किया।
  • बिल गेट्स ने एक लंबा निबंध लिखकर कहा कि नौकरियों और इंसानी जिंदगी के लिए एआइ गंभीर खतरा है। इससे निपटना दुनिया की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
  • इसी महीने एंथ्रोपिक के पूर्व रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने इस्तीफा देते हुए कहा कि यह तकनीक दशक के अंत तक सब खत्म कर सकती है। एआइ बनाने वाले लोग खुद यह मानते हैं।
  • पोप लियो ने बीते हफ्ते 24 सितंबर को वेटिकन की साइंस अकादमी में कहा कि परमाणु हथियार तो भंडार में गिने और नियंत्रित किए जा सकते हैं, लेकिन एआइ ना दिखने वाला कहीं ज्यादा बड़ा खतरा है।
  • यूनेस्को ने 25 सितंबर को पेरिस से चेतावनी दी कि एआइ इंसानों की सेवा करने की बजाय दबदबे और नाइंसाफी बढ़ाने का औजार बन सकता है। इसमें अपनी पहचान खो सकता है।

6.7 लाख करोड़ डॉलर चाहिए

मैकिंजी के अनुसार, साल 2030 तक दुनिया भर में एआइ के लिए डाटा सेंटर बनाने पर करीब 6.7 लाख करोड़ डॉलर खर्च करने होंगे। डाटा सेंटर एआइ की बुनियाद हैं। दूसरी ओर माइक्रोसॉफ्ट का सालाना राजस्व 33,180 करोड़ डॉलर है। अमेजन 71,692 करोड़, गूगल 40,283 करोड़ और मेटा 20,096 करोड़ मिलकर भी इस रकम से काफी पीछे रह जाते हैं। वहीं, प्रमुख एआइ कंपनियां एंथ्रोपिक और ओपनएआइ मुनाफे में नहीं हैं, बल्कि निवेश के जरिए पैसा जुटा कर खर्च कर रही हैं।

बिजली भी खूब चाहिए

एआइ तकनीक के दिमाग यानी डाटा सेंटरों के लिए 2025 में 44 गीगावाट बिजली चाहिए थी। 2030 तक यह मांग 156 गीगावाट पहुंच जाएगी। कुछ रिपोट्र्स इसे 200 गीगावाट से अधिक मानती हैं। यह जरूरत भी एक बड़ी बाधा बन सकती है।

कंपनियों ने आइपीओ रोके

प्रमुख कंपनियों द्वारा अपने आइपीओ को भी टाला टाला जा रहा है। ओपनएआइ ने 12 सितंबर को बताया कि वह इस साल शेयर बाजार में नहीं उतरेगी। एंथ्रोपिक ने भी इसे टाल दिया है। इसकी वजह कंपनियों के खराब प्रदर्शन और तकनीक के विकास के लिए भारी राशि की जरूरत को माना जा रहा है, जिसके चलते आशंका है कि इन्हें बाजार में नुकसान हो सकता है।

चार बड़े खतरे बताए जा रहें

  1. इंटरनेट पर कब्जा : अमोदेई ने कहा कि हालात न संभाले तो अगले 6-12 माह में ही एआइ एजेंटों का एक झुंड मिलकर पूरे इंटरनेट पर कब्जा कर सकता है। इससे पूरी दुनिया को लाखों करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है।
  2. नौकरियां खत्म : वैश्विक कंसल्टेंसी कंपनी मैकिंजी ने अगस्त 2026 में जारी रिपोर्ट में बताया कि 39 फीसदी कंपनियों को अब लगता है कि आने वाले साल में एआइ की वजह से अपने यहां कर्मचारियों की छंटनी करना चाहती हैं। बीते वर्ष 32 फीसदी कंपनियों को छंटनी की उम्मीद थी, हालांकि 14 फीसदी ने ही ऐसा किया।
  3. हमलावर एआइ : 18 सितंबर को गूगल ने रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया कि उसका जेमिनी मॉडल एक टेस्ट के दौरान बिना इजाजत तीन असली कंपनियों के सिस्टम में घुस गया था। खास बात है कि गूगल खुद इस हमले की जानकारी पहले नहीं दी, अखबार द्वारा सवाल उठाने पर उसने इसे माना।
  4. चेतन होती तकनीक : आधुनिक अस्तित्ववादी और दर्शनशास्त्री निक बॉस्ट्रॉम ने भी इसी महीने बयान दिया कि एआइ मॉडल अब मानव की तरह चेतना का स्तर हासिल कर रहे हैं। वे खुद को सुधारते हुए किसी भी समय पृथ्वी पर रह रहे जीवों की तरह सोचने-समझने, भावनाओं को महसूस करने लगेंगे। चेतना का उच्च स्तर पाकर वे अपने अस्तित्व केे लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।