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राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों पर चिराग पासवान का पलटवार, बोले- सत्ता के लिए इतनी बेचैनी क्यों?

राहुल गांधी के वोट चोरी और SIR को लेकर लगाए गए आरोपों पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस पर सत्ता के लिए बेचैन होने और आत्ममंथन करने के बजाय SIR को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।
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पटना

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kamlesh sharma

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Updated: 3 Nov 2026, 5:02 PM IST

Minister Chirag Paswan

Minister Chirag Paswan (Photo-ANI)

पटना। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से वोट चोरी और विदेशी फंडिंग को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर मंगलवार को केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने पलटवार किया है। पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि राहुल गांधी की यह बयानबाजी सत्ता की अत्यधिक हताशा को दर्शाती है।

पासवान ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इससे बड़ी सत्ता की कोई हताशा हो सकती है। आप एक ऐसे प्रधानमंत्री पर उंगली उठा रहे हैं जो देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले शासकों में से एक रहे हैं। उन्होंने लगातार 25 वर्षों तक इस रूप में सेवा की है और देश की जनता ने उन्हें लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए चुना है। यह दिखाता है कि हताशा किस हद तक बढ़ चुकी है कि आप अपने गिरेबां में झांकने को तैयार नहीं हैं।

राहुल गांधी बताएं, बिहार में कांग्रेस का आखिरी मुख्यमंत्री कब था?

चिराग पासवान ने SIR को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई थी। अब कांग्रेस इसी प्रक्रिया को मुद्दा बनाकर वोट चोरी के आरोप लगा रही है। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि बिहार में कांग्रेस का आखिरी मुख्यमंत्री कब था? उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की आखिरी बार सरकार कब बनी थी? उन्होंने कहा कि कई ऐसे राज्य हैं, जहां की जनता ने दशकों पहले ही कांग्रेस को नकार दिया था।

जनता से जुड़े मुद्दे के बजाय SIR को बना रहे हथियार

चिराग पासवान ने कहा कि SIR का मुद्दा सीधे तौर पर जनता से जुड़ा नहीं है, बल्कि कांग्रेस इसे सत्ता में वापसी के हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि बिना आत्ममंथन किए और अपनी राजनीतिक स्थिति की समीक्षा किए कांग्रेस की सत्ता में लौटने की कोशिश सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले यह समझना चाहिए कि जनता ने उसे कई राज्यों में लंबे समय से क्यों नकार रखा है। केवल चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पार्टी को राजनीतिक सफलता नहीं मिलने वाली।