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CJP Protest Delhi: दिल्ली में हिरासत के बाद अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास रिहा

Abhijeet Dipke: दिल्ली में विरोध प्रदर्शन से पहले हुई हिरासतों के बाद आंदोलन का अगला चरण शुरू होने जा रहा है। जंतर-मंतर तक पहुंचने की कोशिशों के बीच मेट्रो सेवाओं, पुलिस की रणनीति और चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों ने इस मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
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CJP Protest Delhi

CJP Protest Delhi

CJP Protest: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन कार्यकर्ताओं को रविवार सुबह रिहा कर दिया गया। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को पुलिस हिरासत से छोड़ने का आदेश दिया। मुंबई से दिल्ली पहुंचे इन कार्यकर्ताओं को विमान के भीतर ही पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया था, जिसके बाद राजधानी में विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई।

अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका पर एक साल की शर्त

दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन प्रमुख नेताओं को राहत तो मिल गई है, लेकिन उनकी मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा करते समय अगले एक साल तक शांति और कानून-व्यवस्था भंग करने वाली गतिविधियों से दूर रहने की शर्त रखी गई है।

विमान से उतरने से पहले पुलिस ने लिया हिरासत में, सुबह मिली रिहाई

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं अभिजीत दीपके , सौरव दास और आशुतोष रांका को रविवार सुबह विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष पेश किया गया। सुनवाई के बाद मजिस्ट्रेट ने तीनों को पुलिस हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, रिहाई के बाद उनके अगले कदम और प्रदर्शन की नई रणनीति को लेकर तत्काल कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई।

मामले की शुरुआत 10 अक्टूबर को हुई, जब तीनों कार्यकर्ता मुंबई से विमान के जरिए दिल्ली पहुंचे थे। उनका उद्देश्य जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में हिस्सा लेना था। इस विरोध कार्यक्रम के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जानी थी। लेकिन दिल्ली पहुंचने के बाद वे हवाई अड्डे से बाहर निकल पाते, उससे पहले ही पुलिसकर्मियों ने विमान के अंदर पहुंचकर उन्हें हिरासत में ले लिया।

प्रदर्शन की अनुमति नहीं, राजधानी में बढ़ाई गई सुरक्षा

प्रस्तावित प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस से अनुमति नहीं मिली थी। इसके बाद पुलिस ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी, ताकि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच सकें। पुलिस की कार्रवाई का असर उन कार्यकर्ताओं पर भी पड़ा, जो दूसरे शहर से प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे।

जंतर-मंतर दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों का एक प्रमुख स्थल रहा है। यहां विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक समूहों और नागरिकों की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर प्रदर्शन किए जाते रहे हैं। हालांकि, किसी भी प्रदर्शन के आयोजन में प्रशासनिक अनुमति, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े नियम महत्वपूर्ण होते हैं।