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‘खुली इमरजेंसी जैसे हालात’: दिल्ली की किलेबंदी पर भड़की कॉकरोच जनता पार्टी

कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली में 57 मेट्रो स्टेशन बंद होने और 30-40 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती पर प्रशासन को घेरा, हालात को 'खुली इमरजेंसी' बताया।
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Delhi Police detention

कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली में सुरक्षा इंतजामों पर उठाए सवाल, Photo Source@ ANI

Jantar Mantar Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने रविवार को राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा पाबंदियों और ट्रांसपोर्ट बंद होने को लेकर प्रशासन पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि मौजूदा हालात 'खुली इमरजेंसी' जैसे हैं। दिल्ली में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए CJP कार्यकर्ताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका ने अधिकारियों पर युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन को दबाने के लिए जनता को भारी परेशानी में डालने का आरोप लगाया।

1975 की इमरजेंसी से की तुलना

भारी सुरक्षा तैनाती पर सवाल उठाते हुए दास ने इसकी तुलना 1975 की इमरजेंसी से की और कहा कि शहर को 'छावनी' में बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि, अभी देश भर के हालात खुली इमरजेंसी जैसे हैं। 1975 के तानाशाही शासन के बाद से ऐसे दमनकारी हालात नहीं देखे गए हैं।

दास के मुताबिक, पिछले तीन-चार दिनों में शहर भर में 30,000 से 40,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनमें बॉर्डर पर तैनात सैनिक और कश्मीर, बंगाल व नक्सल प्रभावित इलाकों से एयरलिफ्ट की गई फोर्स शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह सख्ती सिर्फ प्रदर्शनकारियों को नहीं, उन आम नागरिकों को भी सजा देती है जिनका आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं।

पुलिस पर अमानवीय रवैये का आरोप

प्रेस ब्रीफिंग में रांका ने दिल्ली पुलिस के व्यवहार की निंदा की। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता अभिजीत दिपके की दादी का कल निधन हुआ और जिस तरह पुलिस ने यह खबर दी, वह पूरी तरह अमानवीय था। रांका ने आरोप लगाया कि खबर देते समय पुलिसकर्मी कैमरे और माइक्रोफोन लेकर आसपास खड़े थे और निजी दुख के पल को तमाशा बनाने की कोशिश कर रहे थे।

शनिवार को क्या हुआ था?

शनिवार को जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन था, जिसके चलते भारी पुलिस बल तैनात किया गया। गाजीपुर बॉर्डर पर बैरिकेड्स लगे और 45 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रहे। इससे लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के आरोप लगे और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पलटवार किया।

राजधानी में लगभग 1,000 लोग हिरासत में लिए गए, जिनमें आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और CPI(M) नेता पिनाराई विजयन जैसे विपक्षी नाम भी थे। शाम तक राजनीतिक दलों के बीच तानाशाही और अराजकता के आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे।