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‘उनके गुनाह की सजा सिर्फ काला पानी’, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत का हमला

SIR विवाद के बीच कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला बोला और उनके कथित कदाचार के लिए ‘काला पानी’ की सजा को उचित बताया है।
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भारत

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Rahul Yadav

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Sep 26, 2026

Sukhdeo Bhagat, Gyanesh Kumar, SIR Controversy

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत (फोटो - एएनआई)

Sukhdeo Bhagat Kala Pani CEC: विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के लिए ‘काला पानी’ की सजा की मांग की है। भगत ने कहा कि जिस पद पर वह हैं और जिस तरह की जिम्मेदारी उनके पास है उसे देखते हुए कथित कदाचार के लिए काला पानी उचित सजा है।

सुखदेव भगत ने कहा कि चुनाव आयोग जिस व्यवस्था के जरिए देश की चुनावी प्रक्रिया संचालित करता है उसका निष्पक्ष रहना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर चुनाव आयोग किसी खास राजनीतिक दल या सरकार को स्पष्ट तौर पर फायदा पहुंचाता है तो यह संविधान का उल्लंघन है।

BJP की लिस्ट का भी किया जिक्र

कांग्रेस सांसद ने अपने बयान में बीजेपी की ओर से जारी राज्य प्रभारियों की लिस्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने एक दिन पहले राज्य प्रभारियों की लिस्ट जारी की थी और वह उसमें ज्ञानेश कुमार का नाम तलाश रहे थे लेकिन उनका नाम वहां नहीं था। भगत ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त जिस पद पर रहे हैं उसमें बड़ी जिम्मेदारी होती है। उनके मुताबिक, कथित तौर पर पद की जिम्मेदारी का गलत इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में ‘काला पानी’ उचित सजा है।

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल

सुखदेव भगत का यह बयान ऐसे समय आया है जब एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर दर्ज कथित आपत्तियों ने भी विवाद को बढ़ाया है।

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट में कहा गया कि ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता डेटा से जुड़े फैसलों को लेकर थीं।

चुनाव आयोग ने दी अलग प्रतिक्रिया

हालांकि, चुनाव आयोग की तरफ से इन रिपोर्टों पर कहा गया कि आंतरिक निर्णय प्रक्रिया में अलग-अलग राय सामने आना सामान्य है। आयोग ने यह भी कहा कि पिछले 10 महीनों में लिए गए अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। यानी आयोग ने रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों के अस्तित्व को लेकर अलग तथ्य पेश नहीं किया, लेकिन उन्हें निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया।

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