
ममता बनर्जी(फोटो-ANI)
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में कभी ममता बनर्जी और वामपंथी नेता एकदूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते थे, लेकिन राज्य की सत्ता से बेदखल होने के बाद अब तस्वीर बदलने लगी है। कट्टर प्रतिद्वंदी रहीं तृणमूल कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के बीच बातचीत हुई है। चुनाव आयोग को लेकर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और माकपा महासचिव एम बेबी की फोन पर बातचीत हुई है। खास बात यह भी है कि TMC और CPI(M) दोनों ही विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के संस्थापक सदस्य हैं, लेकिन अब तक दोनों के बीच कोई औपचारिक बातचीत या संपर्क नहीं रहा था।
जानकारी सामने आई है कि बीते शुक्रवार को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और सीपीएम महासचिव एम बेबी की फोन पर बातचीत हुई है। दोनों नेताओं ने एकजुट होकर चुनाव आयोग, चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र की विश्वसनीयता बचाने के लिए अभियान छेड़ने की संभावना पर चर्चा की। वहीं, ममता ने कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी फोन पर बातचीत की। इसके साथ ही, अगले दो से तीन दिनों के भीतर इंडिया अलायंस की बैठक बुलाने की अपील भी की है।
इस बातचीत से दो दिन पहले सीपीएम महासचिव ने इंडिया ब्लॉक सहित विपक्षी दलों के नेताओं को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने चुनाव आयोग से जुड़े घटनाक्रम पर चर्चा के लिए बैठक बुलाने की अपील की थी। एम बेबी की चिट्ठी का जवाब देते हुए ममता ने कहा था कि देश में एक असाधारण स्थिति पैदा हो गई है।
बेबी ने अपने पत्र में लिखा था कि जैसा कि आप जानते हैं, 23 सितंबर 2026 को इंडियन एक्सप्रेस में छपा चुनाव आयोग (ECI) से जुड़ा खुलासा विस्फोटक है। यह उजागर करता है कि ECI किस तरह निरंकुश ढंग से काम कर रहा है। यह वाकई एक असाधारण स्थिति है, जिसमें ECI और हमारे लोकतंत्र की विश्वसनीयता दांव पर है। हमने आयोग के कामकाज को लेकर जो भी आपत्तियां उठाई हैं, ECI उन सबको नजरअंदाज करते हुए SIR प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है। इस वजह से 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को उनके वोट देने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जनता विपक्ष की ओर देख रही है कि वह लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और मताधिकार जैसे मूल्यों की रक्षा करे। पार्टियां आपसी सहमति से कोई तारीख और स्थान तय कर सकती हैं ताकि इस असाधारण स्थिति से निपटने की रणनीति पर चर्चा हो सके।
विपक्ष की मांगें और आगे की रणनीति
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चुनाव आयोग के कामकाज की निष्पक्ष जांच कराने और SIR प्रक्रिया रोकने की मांग की है। गुरुवार को विपक्षी दलों ने संसद में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए एक नया नोटिस देने का भी फैसला किया।
गौर करने वाली बात यह भी है कि पश्चिम बंगाल की सत्ता से बेदखल होने के बाद ममता बनर्जी के लिए यह मुश्किल भरा समय है। तृणमूल कांग्रेस खुद एक गंभीर संकट से जूझ रही है। कुछ महीने पहले विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर फूट पड़ गई। इसी महीने चुनाव आयोग ने पार्टी के चुनाव चिह्न और नाम को फ्रीज कर एक और झटका दिया।
Updated on:
26 Sept 2026 09:29 am
Published on:
26 Sept 2026 09:29 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
