
जयराम रमेश (Photo - ANI)
Delimitation Congress Rijiju: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने परिसीमन के मुद्दे पर एकबार फिर मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 16 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परिसीमन के मुद्दे पर पत्र लिखा था। जिस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पत्र का जवाब कल दिया। अब कांग्रेस नेता ने रिजिजू के जवाब पर पलटवार करते हुए मोदी सरकार से तीन सवाल पूछे हैं।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने जवाब में गृह मंत्री द्वारा मार्च 2026 में कुछ चुनिंदा राजनीतिक दलों से किए गए परिसीमन पर परामर्श का जिक्र किया है। कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार ने जवाब में यह नहीं बताया है कि गृह मंत्री ने उन बैठकों में कुछ ऐसे वादे किए थे, जो 16 अप्रैल 2026 को सदन में लिए गए संविधान संशोधन विधेयक में शामिल ही नहीं थे। कांग्रेस ने दावा किया कि यह विधेयक 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में निर्णायक रूप से गिर गया था। रिजिजू के मुताबिक जिन दलों से परामर्श किया गया था, उनमें से ज्यादातर ने विधेयक के खिलाफ मतदान किया था।
कांग्रेस ने कहा कि रिजिजू को समय-समय पर "बागान अर्थव्यवस्था" को बढ़ावा देने की जगह अब इन तीन सवालों का जवाब देना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि क्या मोदी सरकार के पास परिसीमन पर कोई ठोस नया प्रस्ताव है, और क्या उसने इस पर किसी दल से चर्चा की है? उन्होंने कहा कि मोदी सरकार परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने से क्यों अड़ी हुई है? वह अपना नया प्रस्ताव पारदर्शी तरीके से रखकर एक साझा मंच पर सभी दलों की राय क्यों नहीं सुनती?
कांग्रेस के मुताबिक यह सभी विपक्षी दलों की लगातार मांग रही है, जिसे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एक-दो बार नहीं, छह बार लिखित में उठा चुके हैं। इनमें चार पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को और दो किरेन रिजिजू को लिखे गए। क्या मोदी सरकार गिर चुके विधेयक को वापस लाकर, बेहद दागदार दो-तिहाई बहुमत के जरिए उसे दोबारा पास कराने की कोशिश करना चाहती है? कांग्रेस के अनुसार ऐसी कोशिश भी नाकाम होगी।
Updated on:
20 Oct 2026 01:09 pm
Published on:
20 Oct 2026 01:09 pm
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