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बिहारः लद्दाख हादसे में मरने वाले जवान का पार्थिव शरीर पहुंचा पटना, श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचे कोई मंत्री, लोगों में गुस्सा

Ladakh Accident: बीते शुक्रवार को लद्दाख में हुए हादसे में जान गंवाने वाले बिहारी जवान रामानुज यादव का पार्थिव शरीर थोड़ी देर पहले पटना पहुंचा। जहां से उनके पार्थिव शरीर को पालीगंज ले जाया गया। इस दौरान एयरपोर्ट पर जवान को श्रद्धांजलि देने के लिए कोई मंत्री नहीं पहुंचे, इससे लोगों में भारी गुस्सा दिखा।  
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नई दिल्ली

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Prabhanshu Ranjan

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Updated: 29 May 2022, 12:51 PM IST

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लद्दाख हादसे में शहीद हुआ जवान रामानुज कुमार।

Ladakh Accident: 27 मई को लद्दाख में हुए एक भीषण हादसे में भारतीय सेना के सात जवानों की मौत हो गई थी। इस हादसे में जान गंवाने वाले जवानों के पार्थिव शरीर अब उनके-उनके घरों तक पहुंचाएं जा रहे हैं। इस हादसे में बिहार का भी एक जवान शहीद हुआ, जिनका पार्थिव शरीर थोड़ी देर पहले पटना पहुंचा, जहां से सैन्य वाहन में पूरे सम्मान के साथ घर तक पहुंचाया जा रहा है। लेकिन हैरत की बात यह रही कि पटना पहुंचने पर जवान के पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सरकार की ओर से कोई मंत्री नहीं पहुंचे, इसको लेकर लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिला।

दरअसल 27 मई को लद्दाख के तुरतुक सेक्टर में हुए 26 जवानों के ले जा रहा सेना का एक वाहन करीब 90 फीट नीचे श्योक नदी में गिर गया था। इस हादसे में भारतीय सेना के सात जवानों की मौत हो गई थी। जिसमें एक बिहार की राजधानी पटना के पालीगंज निवासी रामानुज यादव भी थे। आज रामानुज यादव का पार्थिव शरीर विमान से पटना पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। लेकिन सरकार की ओर से किसी मंत्री के नहीं पहुंचने से लोगों में नाराजगी दिखी।

एयरपोर्ट पर पालीगंज सहित आस-पास के लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे। उनके हाथों में तिरंगा था, वो शहीद रामानुज यादव अमर रहे के नारे लगा रहे थे। आम तौर पर जब भी कहीं किसी जवान का पार्थिव शरीर पहुंचता हैं तो उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए सरकार के मंत्री पहुंचते हैं। लेकिन बिहार सरकार के मंत्रियों को इतनी फुर्सत तक नहीं थी कि वो अपने जवान को श्रद्धांजलि देने के लिए एयरपोर्ट तक पहुंचते। इसी से लोगों में गुस्सा दिखा। हालांकि पटना के स्थानीय सांसद रामकृपाल यादव वहां दिखे।

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बताते चले कि लद्दाख हादसे में जान गंवाने वाले रामानुज पालीगंज के परियों गांव के रहने वाले थे। उनके पिता लल्लन यादव खेती-किसानी कर परिवार चलाते हैं। रामानुज की शहादत की जानकारी जब गांववालों को मिली तो गांव में मातम फैल गया। घर की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव के लोग शाहीद बेटे के पार्थिव शरीर के इंतजार में थे।

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रामानुज यादव के परिवारवालों ने बताया कि 1 महीने पहले ही रामानुज अपनी बहन की शादी में छुट्टी पर घर आया था। वे 26 अप्रैल को अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। रामानुज महाराष्ट्र के मराठा रेजिमेंट में 2016 में रिक्रूट हुए थे। नायक क्लर्क पर काम करते थे। तीन भाइयों में सबसे छोटे रामानुज की शहादत पर गांववालों को गर्व तो हैं लेकिन नेताओं से मिले तिरस्कार से लोगों में रोष है।