
डिजिटल अरेस्ट ठगी के बड़े गिरोह का भंडाफोड़ (Photo-AI)
Digital Arrest Scam : नई दिल्ली। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है और करीब 10 करोड़ रुपए की ठगी रोकने में सफलता मिली है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी बैंक खाते से जुड़े मोबाइल में ऐसा APK टूल इंस्टॉल करने की तैयारी में थे, जो खाते में आने वाले SMS को साइबर अपराधियों के सर्वर तक पहुंचा देता। इससे ठगी की रकम खाते में पहुंचते ही गिरोह को जानकारी मिल जाती और वे तुरंत अगली कार्रवाई कर सकते थे।
दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट को डिजिटल अरेस्ट ठगी से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान आरोपियों के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस ने द्वारका स्थित एक फ्लैट पर छापा मारकर पांच लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी वहां नया बैंक खाता खुलवाने और उससे जुड़े मोबाइल में SMS इंटरसेप्ट करने वाला APK टूल इंस्टॉल करने की तैयारी कर रहे थे।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संजय भाटिया ने बताया कि जिस बैंक खाते को खोला जा रहा था, उसमें आंध्र प्रदेश के एक पीड़ित से करीब 2 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जा चुके थे। पुलिस ने संबंधित बैंकों से तत्काल संपर्क कर करीब 1.8 करोड़ रुपए की रकम फ्रीज कराई। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की एक महिला द्वारा ट्रांसफर किए गए 21 लाख रुपए भी समय रहते फ्रीज कराए गए।
जांच के दौरान पता चला कि आंध्र प्रदेश के पीड़ित ने अन्य खातों में भी रकम भेजी थी। पुलिस ने संबंधित बैंकों को सूचना देकर उन खातों में रकम पर रोक लगवाई। पुलिस के मुताबिक, इस कार्रवाई से आंध्र प्रदेश के पीड़ित के करीब 7.25 करोड़ रुपए और पश्चिम बंगाल की महिला के 21 लाख रुपए बचाए गए। अन्य मामलों में भी रकम सुरक्षित कराई गई। पुलिस का दावा है कि कुल मिलाकर करीब 10 करोड़ रुपए की साइबर ठगी रोकने में सफलता मिली है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी बैंक खाता खुलवाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल में एक APK फाइल इंस्टॉल कर रहे थे। इस टूल के जरिए खाते से संबंधित SMS साइबर अपराधियों के सर्वर तक पहुंचाए जा सकते थे। जैसे ही किसी पीड़ित की रकम खाते में जमा होती, गिरोह को तुरंत जानकारी मिल जाती और वह पैसे निकालने या आगे ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता था।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर अपराधी आम तौर पर लोगों को फोन या ऑनलाइन माध्यम से डराते हैं और खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या अन्य सरकारी विभागों का अधिकारी बताकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाते हैं।
पुलिस के मुताबिक, द्वारका में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों की पहचान पश्चिम बंगाल के मोहम्मद महफूज रहमान, जम्मू के इजहार आलम और अल्ताफ हुसैन तथा इंकिताब और अनीश खान के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि छापे के दौरान पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि बाद में एक अन्य आरोपी भी पकड़ा गया। पहले से गिरफ्तार आरोपियों को मिलाकर इस मामले में कुल 11 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
जांच में गिरोह से जुड़े मोबाइल फोन, बैंक खातों, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम अकाउंट की जानकारी मिली है। पुलिस ने 70 से अधिक म्यूल बैंक खातों का पता लगाने की बात भी कही है। म्यूल खाते वे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी या अन्य अवैध गतिविधियों से हासिल रकम को इधर-उधर भेजने के लिए किया जाता है।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त संजय भाटिया ने बताया कि शुरुआती जांच में टेलीग्राम हैंडल से जुड़े कुछ संकेत कंबोडिया या दक्षिण-पूर्व एशिया के किसी अन्य देश से संचालन की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसकी पुष्टि आगे की जांच के बाद ही हो सकेगी। साइबर अपराधी प्रॉक्सी और छद्म पहचान का इस्तेमाल कर अपनी वास्तविक लोकेशन छिपा सकते हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध से जुड़े कानूनों के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की जांच में अहम सफलता है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, विदेशी हैंडलर्स और ठगी की रकम के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
Updated on:
13 Oct 2026 05:41 pm
Published on:
13 Oct 2026 05:41 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
