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CEC ज्ञानेश के समर्थन में उतरे बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष, कहा- संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश चल रही है

CEC Gyanesh Kumar: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध और महाभियोग प्रस्ताव की चर्चा के बीच बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने विपक्ष पर संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश का आरोप लगाया। दूसरी ओर राहुल गांधी ने वोट चोरी को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला। जानें पूरा विवाद।
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Dilip Ghosh

मंत्री दिलीप घोष। फाइल फोटो- आईएएनएस

Dilip Ghosh: सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि ये हमेशा ऐसा मुद्दा लाते हैं जो देश के खिलाफ हैं। अब ये ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो गए हैं। शुभेन्दु सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि देश की जितनी संस्थाएं हैं। उसे कमजोर करने की साजिश चल रही है। कुछ लोग हैं, जिन्हें देश का कुछ नहीं पता होता है बस भड़कावे में आकर कुछ दिन तांडव करते हैं।

संसद के दोनों सदनों में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस लाने की विपक्षी दलों की कथित योजना पर दिलीप घोष ने कहा कि आंदोलन करने का सबको हक है लेकिन एक-एक आंदोलन का ऐसा भंडाफोड़ हो रहा है। जनता को इस साजिश के बारे में पता चल रहा है। भविष्य में उनके लिए चुनाव लड़ना मुश्किल हो जाएगा।"

राहुल गांधी ने सीईसी और सरकार पर बोला हमला

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लिखा कि वोट भारतीय लोकतंत्र की नींव है। वोट से ही हमारे संविधान को ताकत, हमारे कानूनों को अधिकार और हमारे सार्वजनिक संस्थानों को वैधता मिलती है। यही कड़ी आधुनिक भारत की पहचान है।

उन्होंने आगे कहा कि आज यह कड़ी टूट गई है, और भारत में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। वोट को खत्म करके, इस सरकार और चुनाव आयोग ने हर भारतीय की आवाज़ पर हमला किया है। इस सरकार ने चोरी किए गए वोटों के दम पर जो कुछ भी किया है, वह गैर-कानूनी है। वोट चोरी से चुना गया सांसद गैर-कानूनी तरीके से अपनी सीट पर बैठा है, और उस सांसद के समर्थन से पास हुआ हर कानून गैर-कानूनी है।

क्या है मामला?

'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने, नाम बहाल करने, अपील और चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे अहम विषयों से था।