
जयराम रमेश (Photo - ANI)
Rajiv Gandhi to Modi: देश की चुनावी राजनीति में युवा मतदाताओं की भूमिका को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए 1988 के उस संवैधानिक बदलाव की याद दिलाई है, जिसने 21 साल की उम्र की जगह 18 साल में मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने राजीव गांधी और मोदी के कार्यकाल की तुलना करते हुए आरोप लगाया कि आज की व्यवस्था में युवा मतदाताओं के अधिकारों पर संकट खड़ा किया जा रहा है।
कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने 1988 में मतदान की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष किए जाने के फैसले को याद करते हुए कहा कि उस समय युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देने की दिशा में कदम उठाया गया था। यह बदलाव संविधान के अनुच्छेद 326 में संशोधन के जरिए हुआ था।
रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में दो प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा कि एक नेतृत्व ने युवाओं को वोट का अधिकार देकर उन्हें राजनीतिक व्यवस्था में मजबूत भागीदार बनाया, जबकि मौजूदा सरकार पर उन्होंने युवा मतदाताओं के अधिकार सीमित करने की कोशिश का आरोप लगाया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद चल रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रक्रिया में युवा मतदाताओं, खासकर Gen Z, को प्रभावित करने वाली दिक्कतें सामने आ रही हैं। पार्टी ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 की प्रक्रिया को कठिन बनाए जाने का भी दावा किया है।
रमेश ने इससे पहले दावा किया था कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने को लेकर चुनाव आयोग को कई बार लिखा। उन्होंने SIR से जुड़ी प्रक्रिया में ECINet सॉफ्टवेयर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग की ओर से यह कहा गया है कि ECINet का संचालन विकेंद्रीकृत है और वैधानिक काम संबंधित अधिकारियों द्वारा ही किए जाते हैं।
केंद्र सरकार के आधिकारिक संवैधानिक दस्तावेज के मुताबिक, 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 के जरिए अनुच्छेद 326 में बदलाव किया गया। इसका उद्देश्य मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष करना था। कानून के उद्देश्यों में यह भी कहा गया था कि इससे देश के युवाओं को राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलेगा। संशोधन 28 मार्च 1989 से प्रभावी हुआ।
इसी ऐतिहासिक फैसले को आधार बनाकर कांग्रेस अब मौजूदा चुनावी बहस को युवाओं के अधिकार और मतदाता सूची की शुचिता से जोड़ रही है। दूसरी ओर, SIR और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर अंतिम तस्वीर संबंधित चुनावी प्रक्रियाओं और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।
Updated on:
25 Sept 2026 10:41 am
Published on:
25 Sept 2026 10:10 am
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