
राहुल गांधी (फाइल फोटो - आईएएनएस)
Goa Congress: गोवा में कांग्रेस की 27 दिवसीय गोय राखोन्न यात्रा आज से शुरू हो रही है। कांग्रेस की 'गोय राखोन्न' यात्रा का मतलब गोवा को बचाना है। इस यात्रा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस सांसद व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केरल की वायनाड सीट से सांसद प्रियंका गांधी भी शामिल होंगी। इस यात्रा को कांग्रेस महासचिव व सांसद केसी वेणुगोपाल ने हरी झंडी दिखाई।
कांग्रेस पार्टी के अनुसार, यह यात्रा गोवा की सभी 40 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी। यह अगले 27 दिनों तक चलेगी। पार्टी की प्रदेश ईकाई ने कहा कि राज्य में पार्टी का संगठन और जनसंपर्क मजबूत करने की दिशा में ये यात्रा अहम अभियान है, जो अलोकप्रिय और नकारा बीजेपी सरकार को उखाड़ फेंकने की दिशा में उठाया जाने वाला कदम है। हालांकि, पार्टी के अंदर की कलह भी कई बार खुलकर सामने आ चुकी है।
कांग्रेस कांग्रेस की प्रदेश ईकाई भी बीते कुछ समय से गुटबाजी की शिकार है। पार्टी के भीतर की बात समय-समय पर उजागर होते रहती है। मई 2026 से आंतरिक विवाद खुलकर तब सामने आया, जब 29 मई को कांग्रेस हाईकमान ने अमित पाटकर को गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (GPCC) के अध्यक्ष पद से हटाकर गिरीश चोडणकर को नया अध्यक्ष नियुक्त किया।
गौरतलब बात ये भी है कि गिरीश चोडणकर पहले भी 2018 से 2022 तक गोवा कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया था। उसके बाद अमित पाटकर अध्यक्ष बने थे।
पाटकर गुट ने हाईकमान के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि बिना सलाह-मशवरा किए फैसला लिया गया। पाटकर समर्थकों ने कहा कि उन्होंने पिछले चार साल में पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का प्रयास किया था। साउथ गोवा सांसद कैप्टन विरिएटो फर्नांडिस ने भी कहा कि उन्हें इस फैसले की जानकारी नहीं दी गई।
पार्टी के अंदर यह चर्चा है कि पाटकर अब अलग राह पर चल रहे हैं। अगर पार्टी नेतृत्व जल्द ही इसे नियंत्रित नहीं करता, तो इससे पार्टी की एकता और सामंजस्य को और नुकसान पहुंच सकता है। पाटकर ने 2023 से 2026 तक गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नेतृत्व किया था। इतना समय कि उन्होंने नेताओं का एक नेटवर्क खड़ा कर लिया, जो उनके नेतृत्व पर निर्भर हो गया। उन्होंने पार्टी के अंदर ऐसा समर्थन आधार भी विकसित किया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
साल 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस राज्य में काफी आश्वस्त दिख रही थी। लेकिन, परिणाम उलट रहे। तब कहा गया कि
आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में पूरा जोर लगाया था। जिससे कांग्रेस का सेक्युलर वोट बैंक प्रभावित हुआ और 40 सदस्यीय विधानसभा में उसकी हार हुई। भाजपा को 20 सीटें मिलीं जबकि कांग्रेस को 11 सीटें मिलीं। फिर भी, कांग्रेस के कई विधायकों ने बाद में पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए।
गोवा के एक राजनीतिक टिप्पणीकार ने कहा कि कांग्रेस संगठन पिछले समय से काफी बदल चुका है। वे अधिक अवसरवादी हो गए हैं, इसलिए उनके लिए अपनी जड़ें फिर से जमाना और ऐसा आधार तैयार करना मुश्किल है जो भाजपा को मजबूती से चुनौती दे सके।” फिलहाल, संगठन के अंदर चोडणकर बनाम पाटकर ही तत्काल विवाद की रेखा है। लेकिन इससे गहरा संघर्ष इस बात पर भी है कि 2027 के चुनावों में कांग्रेस की चुनावी मशीनरी और उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर नियंत्रण पाने के लिए कौन अधिक प्रभाव हासिल करता है।
वहीं, विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंकने से पहले कांग्रेस ने गोवा फॉरवर्ड पार्टी के साथ आम आदमी पार्टी के गठबंधन को बीजेपी के साथ एक्सचेंज ऑफर करार दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आप व गोवा फॉरवर्ड का गठबंधन बीजेपी को मदद करने के लिए बनाया गया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य गोवा में BJP और पंजाब में AAP की स्थिति सुनिश्चित करना है।
Updated on:
22 Sept 2026 01:57 pm
Published on:
22 Sept 2026 01:21 pm
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